Ayurvedic Upchar Se Karen Swapndosh Ki Samasya Ko Door आयुर्वेदिक उपचार से करें स्वप्नदोष की समस्या को दूर

Ayurvedic Upchar Se Karen Swapndosh Ki Samasya Ko Door आयुर्वेदिक उपचार से करें स्वप्नदोष की समस्या को दूर

स्वप्नदोष- 

इस रोग में कभी-कभी स्त्री के नग्न स्वरूप का चलचित्र स्वप्न में आता है। मनुष्य उससे सम्भोग करता है, जिससे नींद में ही वीर्यपात हो जाता है और कपड़े गंदे हो जाते हैं तथा जब इस प्रकार स्वप्न में बार-बार वीर्य निकलने लग जाता है, तो यह रोग समझा जाने लगता है।

यदि स्वप्नदोष मास में 1-2 बार कुंवारे जवान मनुष्य को हो जाये और ऐसा होने से किसी प्रकार की दुर्बलता प्रतीत न हो तो ऐसा स्वप्न रोग नहीं समझा जाता है। इस प्रकार का स्वप्नदोष प्रायः बुरी वासना वाले उपन्यास पढ़ने या अश्लील सिनेमा या टेलीविजन देखने वाले युवकों को होता रहता है। जब पूर्वोत्तर स्खलन इस सीमा से आगे बढ़ जाये और उसके होने से शारीरिक कमजोरी महसूस हो, तो यह रोग की श्रेणी में आ जाता है।

Ayurvedic Upchar Se Karen Swapndosh Ki Samasya Ko Door

युवकों में नाईट फाॅल प्रायः 13 से 14 वर्ष की आयु से होने लग जाता है। आधुनिक चिकित्सा शास्त्र के वैज्ञानिकों का ऐसा मत और कथन है कि नाईट फाॅल एक प्रकार की साधारण स्वाभाविक क्रिया है, जिसमें वीर्य से लबालब भरी हुई वीर्य की थैलियों को शरीर खाली कर देता है, जिससे कि नवीन और हाल का निर्मित वीर्य उसके स्थान में आकर भरता रहे। चूंकि यह कार्य स्वप्न में होता है, इसलिए इसे स्वप्नदोष कहते हैं।

प्राचीन मत ‘वीर्य ही जीवन है तथा इसके एक बूंद के गिरने से जीवन के बहुत अंश की क्षति होती है तथा मृत्यु तक हो सकती है’ को सुन-समझ कर बहुत से नवयुवक नाईट फाॅल होने पर मानसिक अवसाद, भयंकर चिंता एवं अनावश्यक भय से ग्रस्त हो जाते हैं। ऐसे व्यक्तियों को उचित राय-विचार देकर तथा वास्तविकता को समझा कर उनके मनोबल ओर उत्साह को बढ़ाना चाहिए तथा उन्हें निराशा से बचाने के लिए हर संभव प्रयास किये जाने चाहिए।

स्वप्नदोष के लक्षण-

Ayurvedic Upchar Se Karen Swapndosh Ki Samasya Ko Door

आरम्भ में रोगी रात को संभोग का स्वप्न देखता है और वीर्य निकल जाता है। परन्तु जब यह रोग पुराना हो जाता है, तो रोगी को स्वप्न की बातें याद नहीं रहतीं और प्रातः प्रति दूसरे-तीसरे दिन, यहां तक कि रोग की अधिकता में हर रात को या दिन में सोते समय भी नाईट फाॅल हो जाता है। प्रायः ऐसा भी होता है कि कई सप्ताह तक नाईट फाॅल नहीं होता, परन्तु जब इसका क्रम आरम्भ होता है, तो कई-कई दिन तक निरंतर जारी रहता है। वजन कम हो जाता है, चेहरा अंदर धंस जाता है, जिस दिन पूर्वोत्तर स्खलन होता है, उसके दूसरे दिन या उसी दिन रोगी पूरा समय सुस्त और ढीला-ढाला रहता है, आलस्य सताता है, थकावट प्रतीत होती है, रोगी ऊंघता रहता है, दुर्बलता अनुभव होती है तथा किसी-किसी रोगी को माथे और कमर में दर्द प्रतीत होता है, कमर में दर्द रहने लगता है।

स्वप्नदोष के कारण-

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बुरे विचार, अधिक मैथुन, हस्तमैथुन, गुदा मैथुन, कब्ज, बदहज़मी, पेट के बल सोना, अविवाहित रहना, स्त्रियों के सम्पर्क में रहना, शरीर की गर्मी, भोजन के बाद तुरन्त सो जाना, नाईट फाॅल से मन में चिंता उत्पन्न हो जाना, पेट के कीड़े, प्राॅस्टेट ग्लैण्ड की खराश, सुपारी का लम्बा होना, मूत्रमार्ग का प्रदाह, कामेच्छा बढ़ जाना, उत्तेजक वस्तुओं का अधिक प्रयोग, स्तम्भ शक्ति की कमी, वीर्य की थैलियों की ऐंठन, संभोग के विचार में लीन रहना, रोमांटिक व अश्लील साहित्य पढ़ना, नग्न उत्तेजक चित्र देखना, वीर्य की अधिकता, वीर्य की गर्मी, शारीरिक दुर्बलता, मूत्राशय की खराश, सुजाक, नशीली वस्तुयें जैसे शराब आदि का अधिक सेवन, गर्म मसाले और खट्टे भोजन अधिक खाने से भी यह दोष उत्पन्न हो जाता है।

स्वप्नदोष की आयुर्वेदिक चिकित्सा-

1. धतूरे के फूल का पुंकेशर जीरा 12 ग्राम, बंग भस्म 3 ग्राम खरल करके तमाम दवा की 10 पुड़िया बनायें। एक मात्रा शाम को खायें। नाईट फाॅल और शीघ्रपतन के लिए बहुत लाभप्रद है।

2. बढ़ का दूध 10 बूंद सुबह-शाम बताशे में डालकर खायें। नाईट फाॅल में बहुत लाभकारी है।

3. बढ़ वृक्ष की कोपलों को छाया में सुखाकर 2 ग्राम चूर्ण जल से सुबह और शाम प्रयोग करें।

4. भोफली बूटी 6 से 9 ग्राम तक जल में पीस छानकर खांड मिलाकर सुबह-शाम पियें। नाईट फाॅल को दूर करने में बहुत फायदेमंद है।

5. इमली के बीजों को थोड़ा भूनकर छिलका दूर करके मैदा के समान चूर्ण बनायें। डेढ़ माशा(1.5 ग्राम) यह चूर्ण खांड में मिलाकर गाय के दूध के साथ सुबह-शाम खायें, पूर्वोत्तर स्खलन जरूर दूर हो जायेगा।

6. शतावरी, असगंध, विधारा के बीज- हर दवा समान भाग कूट-पीसकर और सबके बराबर खांड मिला लें। 3 ग्राम दवा सुबह-शाम जल या गाय के दूध के साथ खाते रहें। पूर्वोत्तर स्खलन, वीर्य प्रमेह की बहुत ही असरकारी दवा है। वीर्य गाढ़ा हो जाता है और रोगी का वजन बढ़ जाता है।

7. ईसबगोल का छिलका(भूसी) 24 ग्राम को तीन बार बढ़ वृक्ष के दूध में गीला और खुश्क करें। बढ़ वृक्ष की ताजा कोपलें छाया में शुष्क की हुई 12 ग्राम, इमली के बीजों की गिरी 12 ग्राम, बंग भस्म 6 ग्राम सब दवाओं का चूर्ण बनाकर बढ़ वृक्ष के ताजा दूध में भली प्रकार खरल करके मटर के बराबर गोलियां बनायें। 2 से 4 गोलियां सुबह-शाम बकरी या गाय के दूध के साथ खायें या रोगी को खिलायें। इससे वीर्य प्रमेह, पूर्वोत्तर स्खलन, शीघ्रपतन और वीर्य के पतले होने में बहुत फायदा और राहत पहुंचती है।

8. चन्द्रप्रभा वटी(प्राणाचार्य) 1 से 2 गोली मधु या जल से सुबह-शाम लें। पूर्ण चन्द्र रस(प्राणाचार्य) आवश्यकतानुसार 1 से 2 गोली जल से रात को सोते समय लें।

9. स्वप्नारि(पटियाला)- आवयकतानुसार 1-2 गोली जल से सुबह-शाम प्रतिदिन लें।

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10. चिअरप(आयुलैब्स)- आवश्यकतानुसार एक से दो छोटे चम्मच बराबर जल मिलाकर भोजन के बाद दिन में दो बार पिएं।

11. स्वप्नप्रमेहान्तक कैप्सूल(ज्वाला)- आवश्यकतानुसार 1-2 कैप्सूल जल से दिन में 2 बार लें। वीर्य को गाढ़ा करके पूर्वोत्तर स्खलन को दूर करता है।

12. स्वप्नाचूर्ण(प्राणाचार्य)- आवश्यकतानुसार 3 से 6 ग्राम चूर्ण जल से सुबह-शाम लें। पूर्वोत्तर स्खलन में आराम मिलता है।

13. आमलकी रसायन(प्राणाचार्य) 1 से 3 ग्राम तथा असगंध चूर्ण(प्राणाचार्य) 3 से 4 ग्राम एकत्र कर जल से सुबह-शाम लें।

14. त्रिबंग भस्म(ज्वाला) 125 मि.ग्रा. पर्याप्त शहद से सुबह-शाम चाटें।

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