Prakritik Upay Se Karen Swapndosh(Nightfall) Ka Ilaj

Prakritik Upay Se Karen Swapndosh(Nightfall) Ka Ilaj

प्राकृतिक उपाय से करें स्वप्नदोष का इलाज

स्वप्नदोष क्या है?

नींद की अवस्था में अश्लील स्वप्न देखने या बिन देखे जो वीर्यपात होता है, उसे ही स्वप्नदोष कहते हैं।

स्वप्नदोष के कारण-

स्वप्नदोष का मुख्य कारण अप्राकृतिक मैथुन, हस्तमैथुन, अति मैथुन, अश्लील वातावरण में रहना, अश्लील साहित्य पढ़ना, अश्लील विचारों में डूबा रहना, कब्ज़ लगातार रहना, अश्लील चित्र एवं चलचित्र देखना आदि।

स्वप्नदोष के लक्षण-

अस्वभाविक या अत्यधिक नाईट फाॅल होने से वीर्य का क्षरण अधिक होता है, जिससे शरीर कमजोर हो जाता है। दृष्टि कमजोर हो जाना, चेहरे की कान्ति या सुंदरता कम हो जाना और शरीर में अनेक प्रकार के रोग हो जाते हैं। मानसिक शक्ति कमजोर हो जाती है, जिससे स्मरणशक्ति का अभाव हो जाता है। चक्कर आना, कमर दर्द रहना, आंखों के नीचे काले दाग हो जाते हैं, आंखें अंदर धंस जाती है, सिर में भारीपन रहना, आलस्य एवं सुस्ती के साथ पाचन विकार भी हो जाते हैं।

स्वप्नदोष में प्राकृतिक उपाय-

Prakritik Upay Se Karen Swapndosh(Nightfall) Ka Ilaj

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1. नित्य प्रातः नित्यक्रिया से निवृत्त होकर मेहन स्नान करें।

मेहन स्नान क्या है?

मेहन का अर्थ लिंग(शिश्न) है। अर्थात् जननेन्द्रिय का स्नान। इसके लिए एक बड़ा टब लें। इसमें 4 ईंटें या कोई छोटा कम ऊंचाई का पाटा या चैकी(तख्त) रख लें। अब टब में पानी इतना भर दें कि चैकी या ईंटों पर पानी आधा से एक इंच रहे। पानी ठंडा लें। गर्मी के दिनों में पानी फ्रिज या बर्फ का होना चाहिए। इनके अभाव में घड़े(मटके) का पानी लें। अब मेहन स्नान के लिए टब में चैकी या ईंटों पर बिना वस्त्रों के बैठ जायें। बैठे-बैठे तौलिए को उसी पानी में भिगो कर पेडू को दो मिनट तक मलकर धोयें।

2. अब शिश्न के आवरण को अंगुलियों से पकड़ कर त्वचा के अग्रभाग को ठंडे पानी में भिगोकर किसी मुलायम कपड़े से धीरे-धीरे रगड़ कर साफ करें या हाथ से धीरे-धीरे साफ करें। यह क्रिया 10-20 मिनट तक करें। दुबले-पतलों के लिए यह स्नान 10 मिनट तक पर्याप्त है। बड़े कद वालों को 20 मिनट तक यह क्रिया कर सकते हैं।

3. इस मेहन स्नान के बाद ठंडे पानी में तौलिए को भिगोकर पीठ पर रखकर दोनों हाथों से तौलिए के दोनों किनारों को पकड़ कर नीचे-ऊपर इस प्रकार रगड़ें कि रीढ़ की अच्छी प्रकार मालिश हो जाए।

4. पेडू धोने एवं रीढ़ को ठंडक पहुंचाने का काम स्त्रियों को भी पुरूषों की भांति करना चाहिए। इन दोनों क्रियाओं का प्रभाव धीरे-धीरे जननेन्द्रिय एवं स्नायुतंत्र पर पड़ता, जिसके लिए आधुनिक चिकित्सक शामक प्रभावयुक्त औषधि आदि का प्रयोग करते हैं।

5. स्त्रियों को मेहन स्नान के लिए पानी से भीगे किसी मुलायम कपड़े से जननेन्द्रिय के दोनों ओर के भगोष्ठों को धीरे-धीरे मलें।

6. मासिक धर्म आने के समय मेहन स्नान या कटिस्नान स्त्रियां मत करें।

7. मेहन स्नान के बाद भी(कटिस्नान की भांति) शरीर को गर्म करने के लिए कम्बल ओढ़ना, टहलना या व्यायाम करना आवश्यक है।

नोट: यदि टब सुलभ नहीं हो तो स्टूल पर बैठ जाएं। जननेन्द्रिय के नीचे पानी से भरी बाल्टी रखकर मेहन स्नान(जननेन्द्रिय) स्नान करें। अब निम्न निर्देशों पर ध्यान दें।

8. मेहन स्नान के बाद 1 से डेढ़ घंटे तक तेजी से चलते हुए गहरी सांस लेते हुए टहलें।

9. सूर्य निकलने पर 10 मिनट के लिए धूप स्नान के बाद ठंडे पानी से स्नान करें।

10. प्रातः 7 बजे नाश्ते में मौसम के अनुसार कोई फल लें। साथ ही 250 से 300 मि.ली. गाय का धारोष्ण दूध या एक उफान का उबाला हुआ दूध लें।

11. दोपहर साढ़े बारह बजे चोकर वाले आटे की रोटी, 200 से 300 ग्राम हरी सब्जियां एवं थोड़ा सलाद आदि खायें।

12. हरी सब्जियों में नमक, धनिया, हल्दी और जीरे के सिवाय कोई मसाला न डालें।

13. सायं 5 बजे टहलने जरूर जायें।

14. सांय 6 बजे स्नान और दोपहर को भोजन लें।

15. रात्रि 9 बजे पेडू़ पर मिट्टी की पट्टी रखकर ऊपर से कपड़ा रखकर कमर को लपेट कर बांध लें। इस पट्टी को नींद खुलने के बाद खोल दें, नींद रात को या सुबह को।
इन निर्देशों का पालन करने से निश्चित रूप से नाईट फाॅल दूर हो जाएगा। इसके कारणों के अन्तर्गत चर्चित विषयों से दूर रहें।

स्वप्नदोष में कुछ घरेलू उपाय

1. कन्धारी अनार के छिल्के को पीस लें। 3-3 ग्राम नित्य सुबह-शाम पानी के साथ लें।

2. आंवलें का मुरब्बा दोनों समय खायें।

3. सूखे आंवलों का चूर्ण 20 ग्राम पानी आधा कप में भिगो कर लें। 12 घंटे बाद मसल कर छान कर हल्दी का चूर्ण 1 ग्राम मिलाकर पिलायें। पुनः अगली मात्रा के लिए भिगो लें। इस क्रम को जारी रखते हुए नित्य दो बार तब तक लेते रहें, जब तक पूर्ण लाभ न हो जाये। अनुभूत योग है।

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4. असंगध चूर्ण में शक्कर या पिसी मिश्री मिला लें। 6-6 ग्राम नित्य सुबह जल के साथ(दूध के साथ नहीं) लेने से शीघ्रपतन, नाईट फाॅल, दिल की धड़कन तथा मूत्र रोग दूर हो जाते हैं।

नोट: नाईट फाॅल के रोगी को दूध, मक्खन, मलाई आदि वीर्यवर्धक योग मत दें।

5. कबाबचीनी, छोटी इलायची, बंशलोचन, पिप्पली(पीपर) प्रत्येक 10 ग्राम चूर्ण बनाकर मिश्री 40 ग्राम पीसकर मिला लें। आधा-आधा चम्मच नित्य प्रातः सायं एक कप मीठे दूध के साथ सेवन करने से नाईट फाॅल बंद हो जाता है और वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

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