Swapandosh Ka Ayurvedic Upchar

Swapandosh Ka Ayurvedic Upchar

स्वप्नदोष का आयुर्वेदिक उपचार

स्वप्नदोष, नाईट फाॅल(Nightfall)

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निंद्रा के दौरान कोई कामुक स्वप्न देखते हुए उत्तेजना उत्पन्न होकर सोये-सोये में ही वीर्यपात हो जाना स्वप्नदोष कहलाता है। सरल शब्दों में परिभाषित किया जाये तो जब कोई व्यक्ति नींद में किसी स्त्री के साथ संभोग का स्वप्न देखे या फिर किसी सुंदर स्त्री के नग्न संवेदनशील अंगों को देखकर इतना उत्तेजित हो जाता है कि उसे लगता है कि वह सचमुच किसी स्त्री के साथ मैथुन कर रहा है और एकाएक उसका वीर्य वस्त्र में ही निकल जाता है। यह सब प्रक्रिया स्वप्नदोष के अंर्तगत आती है। स्वप्नदोष होने का स्पष्ट अर्थ है कि वीर्य की धारण शक्ति निर्बल हो चुकी है।
यदि स्वप्नदोष कभी-कभार यानी माह में एक या दो बार होता है, तो यह एक सामान्य स्थिति है। किन्तु बार-बार या फिर लगातार ऐसा होता है तो यह रोग की स्थिति हो सकती है, जिसका उपचार वक्त रहने अनिवार्य है। अन्यथा यह रोग आगे चलकर घातक साबित हो सकता है। इसके चलते अन्य सेक्स रोग भी लग सकते हैं जैसे, शीघ्रपतन, धात रोग। यहां तक कि व्यक्ति इस ओर से लापरवाही के दौरान नपुंसकता का भी शिकार हो सकता है।

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स्वप्नदोष के कारण-

रातदिन गंदे विचारों में खोये रहना, अश्लील मूवी देखना, गंदे साहित्य देखना व पढ़ना तथा स्त्रियों के आसपास रहना आदि कारणों के अतिरिक्त हस्तमैथुन की लत, गुदा मैथुन की अधिकता, पशु मैथुन ज्यादा करना या पत्नी के साथ बहुत ज्यादा संभोग करने से वीर्य पतला व शक्तिहीन हो जाता है। पतला वीर्य अपनी धारण शक्ति खो बैठता है और किसी सुंदर स्त्री का ख्याल आते ही या फिर स्वप्न में स्त्री के साथ बातचीत या स्त्री को देखते ही अथवा स्त्री के साथ प्रेमालाप, मैथुन आदि करते ही या करने का प्रयास करते ही वीर्यपात हो जाता है। उसी पल नींद खराब होकर खुल जाती है। नींद खराब होते ही रोगी को महसूस होता है कि उसका वीर्य तो वस्त्र में ही निष्कासित हो गया है और वस्त्र खराब हो गया है।

नीचे पाठकों की जानकारी के लिए स्वप्नदोष नाशक अति गुणकारी आयुर्वेदिक योग प्रस्तुत किये जा रहे हैं। इनमें से कोई भी एक बलाबल, आयु तथा रोगी की अवस्था को देखते हुए सेवन करने का निर्देश दें। आयुर्वेद के बहुपरीक्षित प्रमुख योग नीचे प्रस्तुत हैं-

आयुर्वेदिक इलाज-

Swapandosh Ka Ayurvedic Upchar

1. योग- आमलकी रसायन 2 ग्राम, शंखपुष्पी चूर्ण 2 ग्राम, शहद कुल का दुगना 8 ग्राम।
विधि- आमलकी रसायन तथा शंखपुष्पी चूर्ण मिलाकर एक करें और एक मात्रा के रूप में प्रतिदिन 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का निर्देश दें यह योग अति उपयोगी, असरकारक एवं श्रेष्ठ प्रभावयुक्त है। यह स्वप्नदोष तथा समस्त प्रकार के प्रमेह आदि को नष्ट कर रोगी को बलवान बना देता है। इसका प्रभाव शीघ्र होता है। स्वप्नदोष कितना भी अधिक एवं पुराना क्यों न हो, इस योग के सेवन से आशातीत अंकुश लग जाता है। इस योग के सेवन से शीघ्रपतन, नपुंसकता तथा वीर्य के सभी दोष भी समूल नष्ट हो जाते हैं।

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2. योग- वृहद् पूर्णचंद रस 125 मि.ग्रा., स्वर्ण बंग 125 मि.ग्रा. सीतोपलादि चूर्ण 750 मि.ग्रा.।
विधि- ऐसी 1-1 मात्रा सुबह-शाम मधु से सेवन करने का निर्देश दें। सेवन के पहले तीनों को खरल कर सूक्ष्म और समसर्वत्र बना लें। यह योग अति उत्तम फलदायी होता है। इसके प्रभाव से स्वप्नदोष दूर हो जाता है। रोगी बल-वीर्य बढ़ जाता है तथा कांतिवान बन जाता है। शरीर कमजोर हो जाना, शिश्न दुर्बल-असहाय हो जाना, मैथुन के प्रति उदासीनता, वीर्य के विकार आदि सब इस योग के सेवन से नष्ट हो जाते हैं। रोगी पूर्ण मैथुन आनंद एवं तृप्ति प्राप्त करने लगता है। नपुंसकता तथा शीघ्रपतन भी इस योग से दूर हो जाते हैं।

3. योग- सफेद चंदन बुरादा, सूखा आंवला, धनिया और ताजा गिलोय चूर्ण प्रत्येक 6-6 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त सभी औषधियां कूट कर चूर्ण कर लें और उसके पश्चात् रात को सोेने से पूर्व कोरी हाँडी में डालकर एक पाव पानी में भिगोकर रख दें। सवेरे उठने के पश्चात् छान कर पानी पी जाने का निर्देश दें। यह योग स्वप्नदोष की समस्त अवस्थाओं पर अंकुश लगाकर बल-वीर्य की वृद्धि करता है। नपुंसकता तथा शीघ्रपतन पर भी आशातीत प्रभाव पड़ता है।

Swapandosh Ka Ayurvedic Upchar

4. योग- बंग भस्म 8 ग्राम, शिद्ध शिलाजीत 12.5 ग्राम, भीमसेनी कर्पूर 500 मि.ग्रा., सफेद मूसली 50 ग्राम, बबूल गोंद का पानी आवश्यकतानुसार।
विधि- यह अति गुणकारी औषधि योग है जो स्वप्नदोष, स्वप्नप्रमेह, वीर्य प्रमेह से ग्रस्त रोगी को शीघ्र स्वस्थ कर देता है। उपर्युक्त औषधियां प्राप्त करके खरल में घोंट-पीसकर एक जान कर लें। बबूल के गोंद का पानी आवश्यकतानुसार लेकर धीरे-धीरे डालते हुए औषधियां घोंटते-पीसते जायें। जब 4-6 घण्टे खूब अच्छी तरह घुटाई-पिसाई हो जाये तब 500-500 मि.ग्रा. की गोलियों का निर्माण कर लें। निर्मित गोलियों को छाया में भली-भांति सुखायें। धूप में कदापि नहीं सुखाना चाहिए। 1-1 गोली दिन में 2 बार सेवन करने का निर्देश दें। अति तीव्र अवस्था होने पर 2-2 गोलियां दिन में 2 बार सेवन करायें। गोली सेवन करने के उपरान्त गाय का दूध पीने की सलाह दें। दूध के अभाव में यह गोली त्रिफला जल के साथ सेवन करने के लिए दी जा सकती है। चिकित्सा 40 दिन तक जारी रखें। आवश्यकता हो तो 40 दिन का एक कोर्स और करायें। यह नपुंसकता तथा शीघ्रपतन की चिकित्सा के लिए भी उपयोगी है।

5. योग- स्वर्ण माक्षिक भस्म 10 ग्राम, बंग भस्म 10 ग्राम, अभ्रक भस्म शतपुटी 10 ग्राम, लौह भस्म शतपुटी 10 ग्राम, शिलाजीत शुद्ध 50 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त सभी औषधियों को घोट-पीसकर एक जान कर लें और एक पेचदार ढक्कन युक्त कांच की शीशी में भरकर अलग सुरक्षित रखें। उसके पश्चात् नीचे लिखी जा रही औषधियों को एक एकत्र कर उनका क्वाथ तैयार करें।
योग- तेजपात 10 ग्राम, दालचीनी 10 ग्राम, छोटी इलायची बीज 10 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त तीनों औषधियों को त्रिजात कहा जाता है। तीनों को भली-भांति जौकूट चूर्ण करने के पश्चात् 250 ग्राम पानी में रात को भिगोकर रख दें तथा प्रातःकाल उसको अग्नि पर उबाल दें। जब 60 ग्राम क्वाथ रह जाये, तब उसको उतार कर छान लें। तत्पश्चात् उपर्युक्त औषधियां स्वर्ण माक्षिक भस्म आदि का चूर्ण खरल में डालकर क्वाथ के साथ तीन दिन तक घोंटे। जब भली-भांति घुट जाये तब एक चैथाई ग्राम अर्थात् 250 मि.ग्रा. की गोलियों का निर्माण करें। ये गोलियां स्वप्नदोष, वीर्य प्रमेह, नपुंसकता, मूत्र के साथ वीर्य निकलना, वीर्य के सभी दोष, रक्ताल्पता, पांडु-पीलिया, निर्बलता, कमज़ोरी, कृशता आदि रोगों में रामबाण अचूक असर करती है। मानसिक दुर्बलता के लिए भी यह अति लाभदायक है। यह स्मरणशक्ति वर्धक गोली है। 1-1 गोली ब्रह्मरसायन में घोंटकर दूध के साथ प्रयोग करने का निर्देश दें। यह गोली हर आयु वर्ग के युवा-वृद्ध पुरूषों को सेवन करायी जा सकती है। इसका प्रभाव सर्वोत्तम शक्ति प्रद होता है। यह तीव्र गति से रोगी पर असर करती है और शीघ्र पीड़ित रोगी को स्वस्थ कर कांतिवान बना देती है।

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