Swapandosh Ke Karan Lakshan Aur Desi Ayurvedic Upay

Swapandosh Ke Karan Lakshan Aur Desi Ayurvedic Upay

स्वप्नदोष के कारण लक्षण और देसी आयुर्वेदिक उपाय

स्वप्नदोष(Nightfall) क्या होता है?

नींद में कोई कामुक स्वप्न या अश्लील दृश्य देखते हुए वस्त्र में ही अचानक वीर्य स्खलन होने को स्वप्नदोष कहते हैं। नींद में युवा स्त्री या पुरूष जब ये कामुक स्वप्न देखते हैं? यानी स्त्री देखती है कि वो किसी सुंदर पुरूष के साथ और पुरूष देखता है कि वो किसी सुंदर स्त्री के साथ संभोग कर रहा है। इस परिकल्पित दृश्य में ऐसी गहरी प्रबलता होती है कि स्वप्न देखने वाले स्त्री/पुरूष को लगता है कि वह वास्तविक रूप में संभोग का आनंद ले रहा है और इसी कामावेश में एकाएक नींद में ही वीर्य स्खलन हो जाता है।
यूं तो स्वप्नदोष यानी नाइट फाॅल होना कोई गंभीर समस्या या रोग नहीं है, यह तो युवा उम्र में होने वाली युवाओं की एक नेचुरल प्रक्रिया है। हां, अगर माह में 2 से 3 बार या फिर लगातार नींद में वीर्य स्खलन होता है, तो यह मामला गंभीर हो सकता है, जिसका उपचार वक्त रहते जरूरी है। अन्यथा धीरे-धीरे यह समस्या बढ़कर नपुंसकता का रूप भी ले सकती है।

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स्वप्नदोष के कारण-

1. अश्लील वातावरण में रहना।

2. अश्लील चित्र देखना।

3. अश्लील पत्र-पत्रिकाओं एवं पुस्तकों को पढ़ना।

4. हस्तमैथुन एवं असंयमित संभोग करना।

5. मद्यपान या अन्य उत्तेजक पदार्थों का सेवन करना।

6. कब्ज़ होना।

7. मानसिक परिश्रम अधिक करना।

8. मानसिक तनाव एवं चिंता का शिकार हो जाना।

9. अप्राकृतिक मैथुन करना।

10. यकृत की क्रिया में विकृति होना आदि।

स्वप्नदोष के लक्षण-

1. नींद में वीर्य का निकल जाना।

2. शरीर दिन-प्रतिदिन कमज़ोर होते जाना।

3. मानसिक एवं शारीरिक शक्तियों का अभााव।

4. संभोग में असफल रहना।

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5. चेहरे पर झुर्रियाँ एवं गाल पिचक जाना।

6. चेहरा अंदर धंसा हुआ और श्रीहीन होना।

7. स्मरण शक्ति कमजोर होना।

8. दृष्टि क्षमता का अभाव होना।

9. थोड़े परिश्रम और 10-20 कदम चलने से हांफना।

10. मूत्र के साथ वीर्य निकल जाना।

11. सुस्त रहना,

12. शरीर बराबर टूटता रहना आदि मुख्य कारण है।

स्वप्नदोष के लिए आयुर्वेदिक उपाय-

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1. नित्य रात को कपूर 250 मि.ग्रा. खुरासानी अजवायन के साथ मिलाकर लेने से स्वप्नदोष नहीं होता है।
नोट- कपूर का अधिक मात्रा में अधिक दिनों तक प्रयोग करने से अनेक कुलक्षण हो जाते हैं, अतः उचित मात्रा में ही दें और लाभ होते ही प्रयोग बंद कर दें।

2. बड़े गोखरू का चूर्ण 2-2 ग्राम शर्करा एवं घृत के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से आशातीत लाभ होता है।

3. बड़े गोखरू का फाँट सुबह-शाम सेवन करने से लाभ होता है।

4. समुद्रशोष के बीज 3 से 6 ग्राम पानी में भिगोकर लुआबदार घोल में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से वीर्य का स्तम्भन होता है।

5. बबूल का गोंद 3 ग्राम पानी में भिगोकर इस लुआबदार घोल में मिश्री मिलाकर सुबहश्-शाम दें।

6. गोखरू, बबूल का गोंद, कतीला तथा समुद्रशोष सभी समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। 10 ग्राम रात को थोड़े पानी में भिगो दें। सुबह अच्छी प्रकार घोंट कर स्वादानुसार मिश्री मिलाकर पी लें। पुनः शाम के लिए 10 ग्राम पानी में भिगो दें। इसी क्रम को जारी रखें।

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7. खोआ, मिश्री, जायफल तथा पीपल, बंगभस्म 2 रत्ती के साथ खाने से शरीर पुष्ट और बलवान बनता है। इसके खाने से बल बढ़ता है, वीर्य गाढ़ा होता है और स्वप्दोष नहीं होता।

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8. शतावर चूर्ण 3 ग्राम फांक कर ऊपर से दूध पीने से शक्ति बढ़ती है और कामबल कम नहीं होता है।

9. भिण्डी की जड़ का चूर्ण 10 ग्राम प्रतिदिन दूध के साथ प्रयोग करने से अत्यंत बल एवं शक्ति उत्पन्न होती है और स्वप्नदोष में आराम मिलता है।

10. लौंग, सफेद मूसली, बिदारीकन्द, गिलोय, तज और गोखरू इन्हें समान मात्रा में कूट छान लें। प्रतिदिन रात्रि को दूध के साथ 3 ग्राम खाया करें। इससे बल व वीर्य बढ़ता है।

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