Swapandosh Ki Dawa

Swapandosh Ki Dawa

स्वप्नदोष की दवा

स्वप्नदोष, नाईट फाॅल(Nightfall)

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युवावस्था व बढ़ती उम्र में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण होना स्वाभाविक होता है। यही विपरीत लिंगी आकर्षण मन-मस्तिष्क में उत्तेजना के भाव उत्पन्न करता है और जब यह उत्तेजना काम-तृप्ति की मांग करती है, लेकिन काम-तृप्ति नहीं हो पाती, तो यह कामेच्छा का भाव और भी तीव्र होता जाता है। जिस कारण व्यक्ति स्वप्न में कामुक व अश्लील दृश्य देखने लगता है। उसे लगता है कि वह वास्तविक रूप से संभोग का आनंद ले रहा है और इसी के चलते देखते ही देखते वह नींद में ही स्खलित हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को ही स्वप्नदोष कहते हैं।
सरल भाषा में स्वप्नदोष को परिभाषियत किया जाये, तो नींद में उत्तेजना के कारण होने वाले वीर्यपात को स्वप्नदोष कहते हैं। स्वप्दोष होना यूं तो एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है, जोकि युवावस्था में होना स्वाभाविक है। दरअसल यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझा जाये तो जब काफी लंबे समय तक वीर्य एकत्र होकर अण्डकोष में ही रहता है और उसे बाहर निकलने का अवसर नहीं प्राप्त होता तो वह कोई न कोई बहाना बनाकर यानी स्वप्न में ही उत्तेजनात्मक दृश्य के फलस्वरूप निष्कासित होने का रास्ता स्वयं ही चुन लेता है और व्यक्ति स्वप्न में ही स्खलित हो जाता है और जागने पर पता चलता है कि उसका वस्त्र तो गंदा हो गया है, जिस कारण उसे कभी-कभी आत्मगिलानी भी होने लगती है।
माह में एक से दो या तीन बार स्वप्नदोष होता है, तो यह सामान्य प्रक्रिया है, किन्तु इससे अधिक और बार-बार होता है, तो यह रोग की श्रेणी में गिना जा सकता है, जिसका उपचार करवाना अनिवार्य हो जाता है।

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स्वप्नदोष रोकने की आयुर्वेदिक पद्धति-

Swapandosh Ki Dawa

1. योग- भाँग कासनी के बीज, निलोफर, काहू के बीज, धनिया प्रत्येक 12-12 ग्राम मिश्री और ईसबगोल प्रत्येक 120-120 ग्राम लें।
विधि- ईसबगोल को छोड़कर बाकी सभी औषधियाँ भली-भाँति कूट-पीसकर एक जान चूर्ण बना लें। अंत में बिना कूटे ईसबगोल की भूसी मिला लें। यह चूर्ण स्वप्नदोष को दूर कर पीड़ित रोगी को बल, वीर्य, शक्ति, सामथ्र्य प्रदान करता है। वीर्य प्रमेह के लिए भी यह अति लाभदायक सिद्ध है। 6 ग्राम चूर्ण दिन में 1-2 बार अथवा आवश्यकतानुसार गाय के दूध के साथ सेवन करने का निर्देश दें। अति तीव्र अवस्था हो तो मात्रा बढ़ाकर दें।

2. योग- दरियाई तालमखाना 36 ग्राम, सफेद मूसली 24 ग्राम, गिलोय सत्व 12 ग्राम, मिश्री 60 ग्राम, मखाने की ठुरी छिलका हटाकर 48 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त सभी औषधियाँ साफ-सुथरी प्राप्त करें और सबको घोंट-पीसकर एक जान करके छान लें। यह चूर्ण सर्वोत्तम शक्तिप्रद होता है। इसके प्रभाव से स्वप्नदोष, वीर्य के समस्त दोष, मूत्र के समस्त रोग, वीर्य पतला हो जाना, नपुंसकता, शीघ्रपतन, धात रोग आदि समस्त रोगों का अंत हो जाता है। 6 ग्राम चूर्ण दिन में 2 बार(सुबह-शाम) सेवन करने का निर्देश देने से पीड़ित रोगी को आशातीत लाभ हो जाता है।

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3. योग- तालमखाना 250 ग्राम, केसर 3 ग्राम, शतावर 250 ग्राम, जायफल 3 ग्राम, कौंच की गिरी 250 ग्राम, मिश्री 860 ग्राम, गोखरू 100 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त सभी औषधियाँ एकत्र करें और सभी कूट-पीसकर छान लें। इस चूर्ण की 12 ग्राम मात्रा सुबह-शाम दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार गाय के दूध के साथ सेवन करने का निर्देश देने से पीड़ित रोगी को आशातीत लाभ हो जाता है।
लाभ- यह अति उपयोगी, असरकारक एवं श्रेष्ठ प्रभाव उत्पन्न करने वाला गुणकारी योग है। इसकी प्रभाव शक्ति अति प्रबल होती है। स्वप्नदोष, वीर्य प्रमेह तथा अन्य और भी कई प्रकार के प्रमेहों का यह एकमात्र निष्फल न जाने वाला योग है। यह स्वप्नदोष को समूल नष्ट कर देता है। यह रामबाण असरकारक योग है, जिसका प्रभाव शीघ्र होता है।

4. योग- कीकर का गोंद 20 ग्राम, तेजपात 15 ग्राम, अकरकरा 15 ग्राम, कमरकस 10 ग्राम, उटंगन के बीज 10 ग्राम, छोटी इलायची के बीज 15 ग्राम, सेम्बल का गोंद 20 ग्राम, कतीरा गोंद 20 ग्राम, ढाक का गोंद 20 ग्राम, तुख्म रिहा 10 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त सब औषधियाँ एकत्र करें और कूट-पीसकर एक जान चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की मात्रा 8-10 ग्राम की होती है, जो दूध के साथ रोगी को प्रयोग करने के लिए दी जाती है। 2 सप्ताह के प्रयोग से ही रोगी के चेहरे में चमक उत्पन्न हो जाती है। यह अतिशय गुणकारी लाभ प्रदान कर रोगी को स्वस्थ कर देने वाला अद्भुत योग है। यह समस्त प्रकार के प्रमेह को नष्ट कर देता है। स्वप्नदोष, वीर्य प्रमेह अन्य और भी कई प्रकार के प्रमेह इसके प्रयोग से समूल नष्ट हो जाते हैं।
लाभ- शीघ्रपतन तथा नपुंसकता के लिए भी यह चूर्ण अति लाभ प्रदान करता है। दुर्बलता के कारण होने वाले समस्त विकार इसके सेवन से दूर हो जाते हैं। हृदय को भी यह शक्ति प्रदान करता है। धड़कन के रोगियों के लिए भी यह रामबाण योग है। सेवनकाल में रोगी को मैथुन से परहेज करने का निर्देश दें।

5. योग- शिलाजीत, बंशलोचन, छोटी इलायची बीज और बंग भस्म प्रत्येक 25-25 ग्राम, शहद आवश्यकतानुसार।
विधि- उपर्युक्त समस्त औषधियाँ एकत्र करें और शहद के साथ घोंट-पीसकर एक जान कर लें। जब सब ठीक-ठीक घुट-पीसकर एक हो जाये तब 250-250 मि.ग्रा. की गोलियों का निर्माण कर लें। 1-1 गोली सुबह-शाम अथवा आवश्यकतानुसार गाय के दूध के साथ सेवन करने का निर्देश दें।
लाभ- ये गोलियाँ स्वप्नदोष एवं समस्त प्रकार के प्रमेह को नष्ट कर देती है।

6. योग- सिलखड़ी, बंग भस्म, मूँगा भस्म और बंश लोचन प्रत्येक 6-6 ग्राम, इलायची के बीज 3 ग्राम।
द्रष्टव्य- सिलखड़ी को संगजराहत कहा जाता है।
विधि- उपर्युक्त समस्त औषधियाँ एकत्र करें और घोंट-पीसकर एक जान कर लें। उसके पश्चात् छानकर किसी साफ-सुथरी शीशी में भरकर सुरक्षित रख लें। इस चूर्ण की मात्रा 3 ग्राम की होती है। यह चूर्ण स्वप्नदोष प्रमेह को समूल नष्ट कर देने की क्षमता रखता है। इसके सेवन से पीड़ित रोगी शीघ्र स्वस्थ हो जाता है। वीर्य के समस्त विकारों पर इसके सेवन से अंकुश लग जाता है। पतला वीर्य गाढ़ा हो जाता है। यह परीक्षित योग है। 3 ग्राम की एक मात्रा गाय के दूध के साथ दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का निर्देश दें।

7. योग- लौह भस्म 62.5 मि.ग्रा., शतावर 250 मि.ग्रा., स्वर्ण बंग 250 मि.ग्रा., सफेद मूसली 125 मि.ग्रा., मकरध्वज 62.5 मि.ग्रा., अभ्रक भस्म 62.5 मि.ग्रा.।
विधि- उपर्युक्त सभी औषधियाँ एकत्र कर आपस में मिलाकर एक जान कर लें। यह एक मात्रा के रूप में प्रतिदिन 2 बार(सुबह-शाम) सेवन करने का निर्देश दें। यह मात्रा शहद के साथ सेवन करने का निर्देश देने से आशातीत लाभ प्राप्त हो जाता है। यह औषधि योग स्वप्नदोष को समूल नष्ट कर पीड़ित रोगी को बलवीर्य तथा कांति प्रदान करता है।

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