Swapandosh Ko Door Karne Ke Liye Ayurvedic Upay Kya Hai

Swapandosh Ko Door Karne Ke Liye Ayurvedic Upay Kya Hai

स्वप्नदोष को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक उपाय क्या हैं?

स्वप्नदोष, नाईट फाॅल(Nightfall)

जब किसी व्यक्ति को हस्तमैथुन से पैदा हुई कमजोरियां महसूस होने लगती हैं, तो वह अपनी इच्छाओं को किसी तरह दबाकर हस्तमैथुन छोड़ने की कोशिश करता है, जिससे वह अपने हाथों पर तो काबू पा लेता है, लेकिन मन पर नियंत्रण नहीं कर पाता। उसका मन बेकाबू होकर तरह-तरह के रोमांटिक ख्याली पुलाव बनाता है, जिसके फलस्वरूप उसे रात में नींद की हालत में भी अश्लील विचार आते हैं तथा किसी सुंदर स्त्री से प्रेम-क्रीड़ाएं स्वप्न में करके सोते हुए स्थिति में ही वीर्यपात कर लेता है। ऐसी ही स्थिति को ही स्वप्नदोष कहते हैं।
कभी-कभी यह हालत इतनी बिगड़ जाती है कि चाहे वह दिन में सोए या रात में सोए उसके कपड़े जरूर खराब हो जाते हैं। इसका नियम भी बड़ा अजीब होता है। कभी-कभी तो रोज कई दिन तक लगातार होता है, तो कभी-कभी कुछ दिन रूक-रूक कर होता है। लेकिन कुल मिलाकर यह रोग व्यक्ति की बुद्धि को कुंठित करके परेशान बना देता है। इस रोग से याददाश्त पर भी बुरा असर पड़ता है। पाचन शक्ति गड़बड़ा जाती है और शरीर में वीर्य की कमी हो जाने से सुस्ती-आलस्य की स्थिति पैदा हो जाती है। इसका असर उनके विवाहित जीवन पर भी पड़ता है। इसके लिए ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं हैं, क्योंकि यह रोग उचित चिकित्सा द्वारा बड़ी आसानी से तथा बहुत जल्दी ही ठीक हो जाता है।

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स्वप्नदोष के खास कारण-

बुरे विचार, बुरी संगत, अश्लील वातावरण, अधिक मैथुन, हस्तमैथुन, शरीर की गर्मी, कामेच्छा बढ़ जाना, अश्लील पुस्तकें पढ़ना, पोर्न देखना, हर वक्त स्त्री के निर्वस्त्र अंग-प्रत्यंगों की सोच में डूबे रहना आदि।

स्वप्नदोष के प्रमुख लक्षण-

प्रायः प्रति दूसरे-तीसरे दिन यहां तक की रोगी की अधिकता में हर रात को या दिन में सोते समय भी स्वप्नदोष हो जाता है।

स्वप्नदोष के परिणाम-

चेहरा अंदर धंस जाना, स्वप्नदोष होने पर शरीर ढीला-ढाला रहना, आलस्य, थकावट, लगाातार कमर में दर्द, चेहर पीला होना, वीर्य पतला पड़ जाना आदि।

स्वप्नदोष की आयुर्वेदिक चिकित्सा-

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नींद की अवस्था में वीर्यपात जिसे स्वप्नदोष कहा जाता है, कोई रोग या समस्या नहीं है। युवावस्था में यह भी यौन ग्रंथियों की परिपक्वता के कारण ही होता है तथा शरीर के विकास के क्रम में यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। किन्तु अति हर चीज की बुरी होती है, इसलिए स्वप्नदोष की अति में यह रोग की दृष्टि से देखा जाता है, जिसका उपचार आवश्यक है।

1. अजवायन खुरासानी, तालमखाना, तमर हिन्दी की गिरी समान मात्रा में लें। इसका चूर्ण बनाकर 1 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ खाने से स्वप्नदोष की शिकायत दूर हो जाती है।

2. सालब मिश्री, कूज़ा मिश्री, इमली के बीज प्रत्येक 50 ग्राम, छोटी इलायची 10 ग्राम। कूट-छानकर चूर्ण बना लें। 3 ग्राम दूध के साथ खायें। स्वप्नदोष के साथ-साथ वीर्य प्रमेह, वीर्यल्पता की शिकायतें भी समाप्त हो जाती हैं।

Swapandosh Ko Door Karne Ke Liye Ayurvedic Upay Kya Hai

3. दूध 6 लीटर कढ़ाई में धीमी आग पर उबालें। जब 2 लीटर शेष रह जाये, तो दो किलोग्राम चीनी और 2 किलोग्राम घी डालकर हिलाते रहें। जब मावा बन जाये तो सालब मिश्री 50 ग्राम, शकाकुल बीज 20 ग्राम, बहमन लाल 20 ग्राम, बहमन सफेद 20 ग्राम, उटंगन के बीज 20 ग्राम, बीजबन्द 20 ग्राम, चाँदी के वर्क 50 नग, सोने के वर्क 50 नग, बादाम की गिरी 100 ग्राम, पिस्ता 100 ग्राम लें। इनको पृथक-पृथक कूट कर मावा में सम्मिलित करके बाद में वर्क मिला लें। 50 से 100 ग्राम तक दूध के साथ खाने से वीर्य प्रमेह, शीघ्रपतन, स्वप्नदोष एवं यौन दुर्बलता दूर हो जाती है।

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4. मूसली सफेद 10 ग्राम, मूसली काली 10 ग्राम, सालबदाना 10 ग्राम, सालब मिश्री 10 ग्राम, बहमन सफेद 1 तोला, गोन्द कतीरा 10 ग्राम, ईसबगोल का छिलका 10 ग्राम, बहुफली 10 ग्राम, उटंगन के बीज 10 ग्राम, दालचीनी 10 ग्राम। सबको अलग-अलग कूट-छान कर मिला लें। प्रतिदिन सुबह-शाम 3-3 ग्राम दूध के साथ प्रयोग करें।

5. बढ़ की जटायें सुखाकर चूर्ण करें। 3 से 6 माशा चूर्ण सुबह-शाम धारोष्ण दूध से मिश्री मिलाकर फाकें। वीर्य भी गाढ़ा करेगा और स्वप्नदोष में भी आराम पहुंचेगा।

6. बबूल के कोमल पत्ते 5 से 10 ग्राम खाकर ऊपर से ठंडा पानी पी लें। इससे स्वप्नदोष तथा प्रमेह में लाभ होता है

7. गर्मियों में 10 ग्राम गोन्द कतीर रात्रि को आधा पाव पानी में भिगो दें। सुबह उसमें 20 ग्राम मिश्री मिलाकर प्रयोग करने से 10-15 दिन में स्वप्नदोष में आराम आ जाता है।

8. मुलेठी 250 ग्राम पीसकर छान लें। 20 ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम घी एवं 5 ग्राम शहद मिलाकर सुबह चाटने तथा ऊपर से पाव भर ताजा दूध पीने से स्वप्नदोष का रोग दूर हो जाता है।

9. गोंद कतीरा 150 ग्राम को घी में तल लें, फिर इसे पीसकर उसमें ईसबगोल की भूसी 10 ग्राम तथा तबाशीर 10 ग्राम मिला लें। 15 ग्राम फांक कर ऊपर से गाय का दूध पीने से स्वप्नदोष दूर हो जाता है।

10. बबूल का गोंद 10 ग्राम रात्रि को 125 मि.ली. जल में भिगो दें। प्रातः मल-छानकर 20 ग्राम मिश्री मिलाकर 21 दिन प्रयोग करने से स्वप्नदोष दूर हो जाता है।

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11. सत गिलोय 3 ग्राम, मिश्री 3 ग्राम, बादाम की गिरी एक नग पीसकर मक्खन मिलाकर ऊपर से मधु मिश्रित दूध सुबह-शाम पीने से स्वप्नदोष 8 दिन में ही ठीक हो जाता है।

12. भीमसेनी काफूर आधा ग्राम पान के रस से खाने से स्वप्नदोष से छुटकारा मिल जाता है।

13. ये गोलियां स्वप्नदोष की अत्यधिकता को दूर करती हैं। कुन्दर, बलूत, गुलनार, भांग के बीज प्रत्येक 10 ग्राम। बारीक पीसकर चने के बराबर गोलियां बना लें। प्रतिदिन दो गोलियां रात के समय सेवन करें।

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