Swapandosh Ko Dur Karne Ke Liye Desi Ayurvedic Upay

Swapandosh Ko Dur Karne Ke Liye Desi Ayurvedic Upay

स्वप्नदोष क्या होता है?

नींद के दौरान कोई कामोत्तेजक स्वप्न देखना और स्वप्न देखते-देखते बहुत अधिक उत्तेजना होने पर वीर्यपात हो जाना ही स्वप्नदोष कहलाता है। यदि विस्तार से परिभाषित किया जाये तो जब व्यक्ति नींद में अश्लील दृश्य देखता है या फिर पुरूष ऐसा स्वप्न देखता है कि वह किसी सुंदर स्त्री के साथ संभोग कर रहा है, तो उस समय उसे ऐसा प्रतीत होता है कि वह स्वप्न में नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से किसी स्त्री के साथ है और सहवास कर रहा है। और फिर यह भ्रम तब टूटता है जब एकाएक चरम पर पहुुंच कर व्यक्ति स्खलित हो जाता है और उसके वस्त्र खराब हो जाते हैं, गीलापन महसूस होता है। यह सब क्रिया-कलाप स्वप्नदोष के अंर्तगत आते हैं।

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स्वप्नदोष होने के मुख्य कारण-

1. स्वप्नदोष का मुख्य कारण है अप्राकृतिक मैथुन।

2. हस्तमैथुन का आदि होना।

3. अधिक मात्रा में मैथुन करना।

4. अश्लील वातावरण में रहना।

5. अश्लील साहित्य पढ़ना।

6. अश्लील विचारों में डूबा रहना।

7. कब्ज़ लगातार रहना।

8. अश्लील चित्र एवं चलचित्र देखना आदि।

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स्वप्नदोष के लक्षण-

1. अस्वभाविक या अत्यधिक नाईट फाॅल होने से वीर्य का क्षरण अधिक होता है, जिससे शरीर कमजोर हो जाता है।

2. दृष्टि कमजोर हो जाना।

3. चेहरे की कान्ति या सुंदरता कम हो जाना और शरीर में अनेक प्रकार के रोग हो जाते हैं।

4. मानसिक शक्ति कमजोर हो जाती है, जिससे स्मरणशक्ति का अभाव हो जाता है।

5. चक्कर आना।

6. कमर दर्द रहना।

7. आंखों के नीचे काले दाग हो जाते हैं और आंखें अंदर धंस जाती हैं।

8. सिर में भारीपन रहना।

9. आलस्य एवं सुस्ती के साथ पाचन विकार भी हो जाते हैं।

स्वप्नदोष दूर करन के लिए आयुर्वेदिक उपाय-

Swapandosh Ko Dur Karne Ke Liye Desi Ayurvedic Upay

1. शीलाजीत 2 तोला, बंशलोचन 2 तोला, छोटी इलायची 2 तोला, बंग भस्म 2 तोला, शहद आवश्यकतानुसार।
उपरोक्त समस्त औषधियाँ एकत्र करें और शहद के साथ घोट-पीसकर एक जान कर लें। जब सब ठीक-ठीक घुट-पीसकर एक हो जाये, तब 2-2 रत्ती की गोलियों का निर्माण कर लें। ये गोलियां समस्त प्रकार के प्रमेह को नष्ट कर देती हैं। इसका प्रभाव अति प्रबल शक्तिशाली होता है। ये तेज गति से अपना कार्य सम्पादित कर पीड़ित रोगी को स्वस्थ-निरोग कर देने वाली अद्भुत गोलियां हैं। इन गोलियों को प्रयोग कराने से पीड़ित रोगियों का स्वप्न प्रमेह नष्ट हो जाता है। नपुंसकता तथा शीघ्रपतन पर भी आशातीत अंकुश लग जाता है। 1-1 गोली सुबह-शाम दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार गाय के दूध के साथ प्रयोग करने का पीड़ित को निर्देश दें। ये गोलियां स्वप्नदोष, स्वप्नदोष प्रमेह के लिए रामबाण होती हैं।

Swapandosh Ko Dur Karne Ke Liye Desi Ayurvedic Upay

2. सिलखड़ी 6 माशा, बंग भस्म 6 माशा, मूंगा भस्म 6 माशा, बंश लोचन 6 माशा, इलायची के बीज 3 माशा।
नोट- सिलखड़ी को संगजराहत कहा जाता है।
उपरोक्त समस्त औषधियाँ एकत्र करें और घोट-पीसकर एक जान कर लें। उसके पश्चात् छानकर किसी साफ-सुथरी शीशी में भरकर सुरक्षित रख लें। इस चूर्ण की मात्रा 3 माशा की होती है। यह चूर्ण स्वप्न प्रमेह को समूल नष्ट कर देने की क्षमता रखता है। इसके प्रयोग से पीड़ित रोगी शीघ्र स्वस्थ हो जाता है। स्वप्न प्रमेह सहित यह नपुंसकता, शीघ्रपतन के लिए भी प्रयोग कराया जा सकता है। वीर्य के समस्त विकारों पर इसके प्रयोग से अंकुश लग जाता है। पतला वीर्य गाढ़ा हो जाता है। इस योग की प्रभाव शक्ति अति प्रबल होती है। इसीलिए यह तीव्रता से कार्य करता है। यह परीक्षित योग है। 3 माशा की एक मात्रा गाय के दूध के साथ दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का निर्देश दें।

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3. शुद्ध शीलाजीत एक तोला, तवखीर एक तोला, मुलहठी एक तोला, तालमखाना एक तोला, पाषाण भेद एक तोला, गिलोय सत्व एक तोला, इलायची एक तोला, सोने के वर्क 3 माशा, चांदी के वर्क 6 माशा, बंग भस्म एक तोला, अभ्रक भस्म 6 माशा, लौह भस्म 4 माशा, अकीक भस्म 6 माशा, मूँगा भस्म 6 माशा, मुलहठी एक तोला, कूजे की मिस्री(उपरोक्त सभी औषधियों के बराबर वजन की लें)।
उपरोक्त सारी औषधियाँ प्राप्त करके घोट-पीसकर एक जान कर लें। अंत में महीन पिसी हुई कूजे की मिश्री मिलाकर एक कर लें। मिस्री मिलाने के पूर्व उपरोक्त औषधियों काके पीसने-कूटने के पश्चात् छान लें। अब यह चूर्ण प्रयोग के लिए तैयार है। इस चूर्ण को किसी शीशी में भरकर सुरक्षित रख लें। इस चूर्ण की मात्रा प्रतिदिन 6 माशा की होती है। यह मात्रा दिन में 2 बार सुबह-शाम बकरी या गाय के दूध के साथ प्रयोग करने के लिए दें। दूध मिस्री मिलाकर देना चाहिए। यह चूर्ण स्वप्नदोष-स्वप्न प्रमेह तथा अन्य समस्त प्रकार के प्रमेह रोगों के लिए अतिशय गुणकारी सिद्ध है। यह समस्त मूत्र रोगों के लिए भी लाभदायक होता है। नपुंसकता-नामर्दी तथा शीघ्रपतन को भी यह चूर्ण जड़ से उखाड़ देता है। इसके प्रयोग से पीड़ित रोगी पूर्ण सक्षम हो जाता है।

4. लौह भस्म आधी रत्ती, स्वर्ण बंग 2 रत्ती, मकरध्वज आधी रत्ती, शतावर 2 रत्ती, सफेद मूसली एक रत्ती, अभ्रक भस्म आधी रत्ती।
उपरोक्त सभी औषधियाँ स्वप्नदोष को दूर करने के लिए रामबाण सिद्ध होती हैं। इन सभी औषधियों को एकत्र करके आपस में मिलाकर एक जान कर लें। यह एक मात्रा के रूप में प्रतिदिन 2 बार सुबह-शाम प्रयोग करने का पीड़ित को निर्देश दें। यह मात्रा शहद के साथ प्रयोग करने का निर्देश देने से आशातीत लाभ अर्जित हो जाता है। यह औषधि योग स्वप्नदोष को समूल नष्ट कर पीड़ित रोगी को बल-वीर्य तथा कांति प्रदान करता है। नपुंसकता-नामर्दी तथा शीघ्रपतन भी इससे नष्ट हो जाता है। इसका प्रभाव सर्वोत्तम शक्तिशाली होता है।

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