Swapandosh Rokne Ke Upay

Swapandosh Rokne Ke Upay

स्वप्नदोष रोकने के उपाय

स्वप्नदोष का परिचय-

Swapandosh, Swapandosh Ka Ilaj, Nightfall Treatment

सुप्तावस्था में अश्लील स्वप्न देखने के बाद या बिना स्वप्न देखे यदि वीर्य स्खलित हो जाता है, इसे ‘स्वप्नदोष’ कहते हैं।

अधिकांश नौजवान स्वप्नदोष की वजह से उनके शरीर की शक्ति व्यर्थ नष्ट होती चली जाती है। स्वप्नदोष कोई रोग नहीं है। यह मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाला एक विकार मात्र है सात्विक विचारधारा इस दूषित विकार से छुटकारा दिला सकती है। स्वप्नदोष की जड़ में गंदा अश्लील साहित्य पढ़ना, गंदा अश्लील साहित्य पढ़ना, गंदी फिल्में देखना, दूषित विचार, पारिवारिक पृष्ठभूमि, अज्ञानता आदि प्रमुख हैं। विपरीत सेक्स के प्रति लगाव संसार के हर जीव, प्राणी और मनुष्य में समान रूप से विद्यमान हैं।

फर्ज कीजिए एक युवक सेक्स के प्रति अत्यधिक आकर्षित है। वह जब भी किसी खूबसूरत युवती, महिला आदि को देखता है, कल्पना में तुरन्त उसके कपड़े उतार कर उसके साथ एक क्षण में ही मैथुन कर डालता है। बस यही स्वप्न दर्शन दिमाग के संबंधित ‘सेल’ ग्रहण करके सुरक्षित रख लेते हैं। जो कभी एकाएक स्वप्न में प्रकट हो जाती है। युवतियों के साथ भी यही होता है। हां, यदि विचारधारा सात्विक हो तो ऐसी कल्पनाएँ थोड़ी कम होती हैं, परिणामस्वरूप स्वप्नदोष भी कम होते हैं।

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इसके अतिरिक्त स्वप्नदोष, हस्तमैथुन की आदत के कारण भी होता है। हस्तमैथुन करने वाला हस्तमैथुन यूं ही नहीं प्रारम्भ कर देता है। उसके पूर्व वह किसी काल्पनिक नायिका के रूप सौंदर्य की कल्पना करता है तथा कल्पना में भी वह उसके साथ मैथुन प्रारम्भ कर देता है और अंत में वीर्यपात हो जाता है। काल्पनिक नायिका उसकी परिचित भी हो सकती है, नहीं भी। बस, यही दृश्य दिमाग ग्रहण करके सुरक्षित रखता है और सुप्तावस्था में जैसे ही दिमाग के यह सेल सक्रिय होते हैं, वह दृश्य देखना प्रारम्भ हो जाती है और स्खलन हो जाता है।

14-15 वर्ष की आयु से स्वप्नदोष की शिकायतें प्रारम्भ हो जाती हैं, जो एक स्वाभाविक क्रिया है, कोई रोग नहीं। लेकिन स्वप्नदोष की संख्या यदि अत्यधिक बढ़ जाये तो उसकी रोकथाम के उपाय करना आवश्यक है, क्योंकि अति किसी भी चीज की हो, नुकसानदायक ही होती है। मादक पदार्थों का प्रयोग, दूध अधिक पीना, शरीर में वीर्य अधिक बढ़ जाना, वीर्य ग्रंथियों की ऐंठन, कृमि, गुप्त रोग, वृक्क रोग, वीर्य का कम हो जाना, कब्ज़ आँतें साफ न रहना, मल-मूत्र को रोके रखना आदि कारणों से भी स्वप्नदोष का विकार उत्पन्न होता है।

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स्वप्नदोष से छुटकारा पाने के लिए औषधि प्रयोग के साथ-साथ रोगी की शारीरिक दुर्बलता, प्रोस्टेट ग्रंथि-मूत्राशय की खराश, कृमि रोग, अजीर्ण आदि के अतिरिक्त रोगी की मानसिकता से गंदी विचारधारा को भी निकाल फेंकना अति आवश्यक है। चिकित्सा कितनी भी की जाती रहे। यदि रोग रातदिन रतिक्रिया की कल्पना, स्त्रियों के बीच उठना-बैठना, गंदे चित्र, गंदी फिल्में, गंदे साहित्य आदि में खोया रहेगा तो स्थिति ज्यों की त्यों बनी रहेंगी। चिकित्सा का कोई भी असर नहीं होगा।

स्वप्नदोष के लक्षण-

यदि स्वप्नदोष अधिक दिनों तक होता रहे तो रोगी दिनानुदिन कमजोर होने लगता है। चेहरा तेजहीन हो जाता है और सुंदरता धीरे-धीरे कम हो जाती है। दुर्बलता वृद्धि के साथ-साथ अनेक प्रकार के रोगों का आक्रमण होने लगता है। आँखों का अंदर धंस जाना, दृष्टि कमज़ोर हो जाना, सिर बराबर भारी प्रतीत होना, प्रत्येक अंग का टूटना आदि लक्षण प्रकट होने लगते हैं।

स्वप्नदोष के रोगी को नित्य सुबह-शाम खुली वायु में घूमना चाहिए। उत्तेजक आहार, नहीं लेना चाहिए। धार्मिक ग्रंथ पढ़ने चाहिए और उनके संबंध में ही बातें करनी चाहिए। मन को प्रसन्न रखना चाहिए। मूत्र करने के बाद जननेन्द्रिय को धोना चाहिए। नित्य प्रातः स्नान करना हितकर है।

स्वप्नदोष की घरेलू चिकित्सा-

Swapandosh Rokne Ke Upay

1. छाया में सुखाये गये अनार के छिल्कों का चूर्ण रोगी को देने से स्वप्नदोष में आराम पहुंचता है। आधा-आधा चम्मच प्रातःसायं ताजे पानी के साथ रोगी को सेवन करायें।

2. बड़ी गोखरू 30 ग्राम के चूर्ण को 300 मि.ली. उबलते पानी में डाल दें। एक घंटे पश्चात अच्छे मलकर व छानकर जरा-जरा करके पीड़ित को पिलाते रहें। रोजाना यह उपाय करने शीघ्र ही स्वप्नदोष से छुटकारा मिल जाता है।

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3. गोखरू के फलों का चूर्ण 2-2 ग्राम शर्करा एवं घृत के साथ रोज सुबह-शाम स्वप्नदोष के रोगी को सेवन करायें और ऊपर से गाय का दूध पिलायें। पिलाने से पहले इसमें मिश्री मिला दें।

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4. इमली के बीजों को आग पर हल्का भूनकर छिलका उतार कर मैदा जैसा बारीक चूर्ण तैयार कर लें। 2 ग्राम खाण्ड में मिलाकर रोजाना प्रातः-सायं दूध के साथ रोगी के दें।

5. शतावरी, असगंध नागौरी और बिधारा की जड़ समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर इसके बराबर खाण्ड मिला लें। 2 से 3 ग्राम दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से स्वप्नदोष एवं अन्य वीर्य विकार दूर हो जाते हैं।

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