Swapandosh Se Chutkara Pane Ke Liye Ayurvedic Upchar

Swapandosh Se Chutkara Pane Ke Liye Ayurvedic Upchar

स्वप्नदोष(Nightfall) क्या होता है?

जब कोई स्त्री या पुरूष नींद में कामोत्तेजक दृश्य देखकर अथवा पुरूष किसी स्त्री के गुप्त अंग-प्रत्यंग या स्त्री, किसी नौजवान गबरू पुरूष के कामुक स्वप्न देखे और स्खलित हो जाये, तो इसे स्वप्नदोष कहा जाता है।
स्वप्न में खुद के द्वारा संभोग करने का दृश्य देखकर ऐसा अनुभव होता है कि संभोग का वास्तविक आनंद लिया जा रहा है और स्वप्न देखने वाले व्यक्ति का वीर्यपात हो जाता है इस स्थिति को भी स्वप्नदोष कहा जाता है। युवा अवस्था में ऐसा होना स्वाभाविक है, क्योंकि विपरीत सेक्स के प्रति आकर्षण होने लगता है। किन्तु माह में 2 से 3 बार हो, तो कोई विशेष बात नहीं है, लेकिन अगर इससे अधिक बार स्वप्नदोष होता है तो यह चिंता का विषय हो सकता है व्यक्ति के लिए।

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स्वप्नदोष रोकने की आयुर्वेदिक चिकित्सा-

Swapandosh Se Chutkara Pane Ke Liye Ayurvedic Upchar

1. स्वर्ण माक्षिक भस्म 10 ग्राम, बंग भस्म 10 ग्राम, अभ्रक भस्म शतपुटी 10 ग्राम, लौह भस्म शतपुटी 10 ग्राम, शिलाजीत शुद्ध 50 ग्राम।
उपरोक्त सभी औषधियों को घोट-पीसकर एक जान कर लें और एक शीशी में भरकर अलग सुरक्षित रखें। उसके पश्चात् नीचे लिखी जा रही औषधियों को एकत्र कर उनका क्वाथ तैयार करें।
तेजपात 10 ग्राम, दालचीनी 10 ग्राम, छोटी इलायची 10 ग्राम।
उपरोक्त तीनों औषधियों को त्रिजात कहा जाता है। तीनों को भली-भांति चूर्ण करने के पश्चात् 200 ग्राम पानी में रात को भिगोकर रख दें तथा सुबह उसको अग्नि पर उबाल दें। जब 50 ग्राम क्वाथ रह जाये, तब उसको कतार कर छान लें। तत्पश्चात् उपरोक्त औषधियाँ स्वर्ण माक्षिक आदि का चूर्ण खरल में डालकर क्वाथ के साथ तीन दिन तक घोंटे। जब भली-भांति घुट जाये, तब एक चैथाई ग्राम की गोलियों का निर्माण करें। ये गोलियां स्वप्नदोष, वीर्य प्रमेह, नपुंसकता, वीर्यस्राव, मूत्र के साथ वीर्य निकलना, वीर्य के सभी दोष, रक्ताल्पता, पांडु-पीलिया, निर्बलता-कमजोरी, हीनता-कृशता आदि रोगों के लिए रामबाण अचूक असर करती है। मानसिक दुर्बलता के लिए भी यह अतीव लाभदायक है। यह स्मरण शक्तिवर्धक गोली है। 1-1 गोली ब्रह्मरसायन में घोंट कर दूध के साथ प्रयोग करने का निर्देश दें। यह गोली हर आयु वर्ग के युवा-वृद्ध पुरूषों को प्रयोग करायी जा सकती है। इसका प्रभाव सर्वोत्तम शक्तिशाली होता है। यह तीव्र गति से रोगी पर असर करती है और शीघ्र पीड़ित रोगी को स्वस्थ-निरोग कर कांतिवान बना देती है।

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2. भाँग एक ग्राम, कासनी के बीज एक ग्राम, निलोफर एक ग्राम, काहू के बीज एक ग्राम, धनिया एक ग्राम, मिश्री 10 ग्राम, ईसबगोल 10 ग्राम।
यह स्वप्नदोष की निश्चित लाभ प्रदान करने वाली गुणकारी औषधि है। इसका प्रयोग निष्फल नहीं जाता। ईसबगोल को छोड़कर बाकी सभी औषधियाँ भली-भांति कूट-पीसकर एक जान चूर्ण बना लें। उसके पश्चात् अंत में बिना कूटे ईसबगोल की भूसी मिला दें। यह चूर्ण स्वप्नदोष को दूर कर पीड़ित रोगी बल-वीर्य, शक्ति, सामथ्र्य प्रदान करता है। वीर्य प्रमेह के लिए भी यह अतीव लाभदायक सिद्ध होता है। 6 ग्राम चूर्ण दिन में 1-2 बार अथवा आवश्यकतानुसार गाय के दूध के साथ प्रयोग करने का निर्देश दें। अति तीव्र अवस्था हो तो मात्रा बढ़ाकर दें।

3. दरियाई तालमखाना 3 ग्राम, मखाने की ठुर्री 4 ग्राम, मिस्री 5 ग्राम, सफेद मूसली 2 ग्राम, गिलोय सत्व एक तोला।
उपरोक्त सभी औषधियाँ साफ-सुथरी प्राप्त करें और सबको घोंट-पीसकर एक जान करके छान लें। यह चूर्ण सर्वोत्तम शक्तिशाली होता है। इसके प्रभाव से स्वप्नदोष, वीर्य के समस्त दोष, मूत्र के समस्त रोग, वीर्य पताला हो जाना, नपुंसकता, शीघ्रपतन मूत्र के साथ वीर्य स्राव होना, वीर्य प्रमेह आदि समस्त रोगों का अंत हो जाता है। 6 ग्राम चूर्ण दिन में 2 बार सुबह-शाम सेवन करने का निर्देश देने से पीड़ित रोगी को आशातीत लाभ अर्जित हो जाता है।

4. तालमखाना 250 ग्राम, शतावर 250 ग्राम, कौंच की गिरी 250 ग्राम, गोखरू 100 ग्राम, केसर 3 ग्राम, जायफल 3 माशा, मिस्री 750 ग्राम।
यह अति उपयोगी, असरकारक एवं श्रेष्ठ प्रभाव उत्पन्न करने वाला गुणकारी योग है। इसकी प्रभाव शक्ति अति प्रबल शक्तिशाली होती है। स्वप्नदोष-स्वप्नप्रमेह, वीर्य प्रमेह तथा अन्य और भी कई प्रकार के प्रमेहों का यह एकमात्र निष्फल न जाने वाला योग है। यह स्वप्नदोष को समूल नष्ट कर देता है। उपरोक्त सभी औषधियाँ एकत्र करें और सभी को कूट-पीसकर छान लें। इस चूर्ण की एक तोला मात्रा सुबह-शाम दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार गाय के दूध के साथ सेवन करने का निर्देश देने से पीड़ित रोगी को आशातीत लाभ मिलता है। यह रामबाण असरकारक योग है, जिसका प्रभाव अति शीघ्र होता है।

Swapandosh Se Chutkara Pane Ke Liye Ayurvedic Upchar

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5. कीकर का गोंद 20 ग्राम, अकरकरा 15 ग्राम, उटगंन के बीज 10 ग्राम, सम्बल का गोंद 20 ग्राम, ढाक का गोंद 20 ग्राम, तेजपात 15 ग्राम, कमरकस 10 ग्राम, छोटी इलायची 15 ग्राम, कतीरा गोंद 20 ग्राम, सुरव्म रिहां 10 ग्राम, बढ़ के कच्चे फल का चूर्ण आवश्यकतानुसार।
यह अतिशय गुणकारी लाभ प्रदान कर, रोगी को स्वस्थ-निरोग कर देने वाला अद्भुत योग है। यह समस्त प्रकार के प्रमेह को नष्ट कर देता है। स्वप्नदोष, वीर्य प्रमेह सहित अन्य और भी कई प्रकार के प्रमेह इसके प्रयोग से समूल नष्ट हो जाते हैं। उपरोक्त सब औषधियाँ एकत्र करें और कूट-पीसकर एक जान चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की मात्रा 8-10 ग्राम की होती है, जो दूध के साथ रोगी को प्रयोग करने के लिए दी जाती है। 2 सप्ताह के प्रयोग से ही रोगी के चेहरे में चमक उत्पन्न हो जाती है। शीघ्रपतन तथा नपुंसकता के लिए भी यह चूर्ण अति लाभ प्रदान करता है। दुर्बलता के कारण होने वाले समस्त विकार इसके प्रयोग से दूर हो जाते हैं। हृदय को भी यह शक्ति प्रदान करता है। धड़कन के रोगियों के लिये भी यह रामबाण योग है। प्रयोगकाल में रोगी को मैथुन से परहेज करने का निर्देश दें।

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