Swapandosh(Nightfall) Door Karne Ke Desi Ayurvedic Upay

Swapandosh(Nightfall) Door Karne Ke Desi Ayurvedic Upay

स्वप्नदोष(नाईट फाॅल) दूर करने के देसी आयुर्वेदिक उपाय

स्वप्नदोष की अति गुणकारी आयुर्वेदिक चिकित्सा-

स्वप्नदोष होना कोई विशेष उल्लेखनीय रोग नहीं है। यह करीब-करीब हर युवा को होता है, फर्क सिर्फ इतना है कि कई युवा-प्रौढ़ अथवा किसी भी आयु का पुरूष स्वप्न में स्खलित हो जाता है तथा कई लोग स्खलित नहीं होते। स्वप्न में स्खलित होना ही वास्तव में रोग है। जो लोग स्खलित नहीं होते, वे इस रोग से पीड़ित नहीं माने जाते।

स्वप्न में वीर्य स्खलित होने का सीधा अर्थ है वीर्य की धारण शक्ति कमज़ोर हो चुकी है। वैसे कभी-कभार स्वप्नदोष होना कोई अर्थ नहीं रखता, लेकिन हर रात स्वप्नदोष होना अथवा अत्यधिक स्वप्नदोष होना उचित नहीं है। रात-दिन गंदे विचारों में मग्न रहना, गंदी फिल्में देखना, गंदी किताबें पढ़ना तथा तथा स्त्रियों के आसपास रहना आदि कारणों के अलावा हस्तमैथुन की अधिकता, गुदा मैथुन की अधिकता, पशु मैथुन की अधिकता तथा अत्यधिक मैथुन करने से वीर्य कमजोर-दुर्बल पतला हो जाता है। पतला वीर्य अपनी धारण शक्ति खो बैठता है और स्त्री का विचार आते ही अथवा स्वप्न में स्त्री के साथ वार्तालाप या स्त्री को देखते ही अथवा स्त्री के साथ प्रेमालाप, मैथुन आदि करते ही या करने का प्रयास करते ही वीर्यपात हो जाता है। उसी क्षण नींद उचट जाती है अथवा खुल जाती है, नींद खुलते ही रोगी को पता चलता है कि उसका वीर्य स्खलित हो चुका है तथा कपड़े खराब हो चुके हैं। यही स्वप्नदोष है। वीर्य को मजबूत-सबल करने की चिकित्सा करने पर स्वप्नदोष स्वयं ही बंद हो जाता है।

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Swapandosh(Nightfall) Door Karne Ke Desi Ayurvedic Upay

नीचे आपकी जानकारी के लिए स्वप्नदोष नाशक अति गुणकारी आयुर्वेदिक योग प्रस्तुत किये जा रहे हैं। समस्त योग उपयोगी, असरकारक एवं श्रेष्ठ लाभ प्रदान करते हैं।

1. अफीम 30 मि.ग्रा., शीतल चीनी 500 मि.ग्रा., बंग भस्म 125 मि.ग्रा., हल्दी महीन चूर्ण 1 ग्राम, गिलोय सत्व 125 मि.ग्रा., कर्पूर 125 मि.ग्रा.।
यह अति उपयोगी, असरकारक एवं श्रेष्ठ प्रभाव उत्पन्न करने वाला योग है। इसकी प्रभाव शक्ति अति प्रबल शक्तिशाली होती है। स्वप्नदोष की चिकित्सा के लिए यह रामबाण अचूक योग है। उपरोक्त एक मात्रा है। यह एक मात्रा रात को सोते समय जल से सेवन करने का निर्देश दें। कुछ दिन के सेवन से स्वप्नदोष पर अंकुश लग जाता है।

2. शुद्ध शिलाजीत 12 ग्राम, गिलोय 12 ग्राम, चांदी वर्क 12 ग्राम, प्रवाल पिष्टी 12 ग्राम, बंग भस्म 12 ग्राम, कर्पूर 3 ग्राम।
उपरोक्त समस्त औषधियाँ एकत्र करें। खरल करके एक जान कर लें। सभी औषधियाँ जब भली-भांति खरल हो जायें, तब 125 मि.ग्रा. की गोलियों का निर्माण कर लें। यह वीर्य शोधक योग है। इसके प्रयोग से वीर्य के समस्त दोष दूर हो जाते हैं। वीर्य गाढ़ा हो जाता है, जिसके फलस्वरूप स्वप्नदोष पर अंकुश लग जाता है। 1-1 गोली दिन में 1-2 बार अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का निर्देश दें। अति तीव्र गंभीर अवस्था का स्वप्नदोष हो तो पीड़ित रोगी को 2-2 गोली दिन में 1-2 बार अथवा आवश्यकतानुसार प्रयोग करने का निर्देश देने से आशातीत लाभ अर्जित हो जाता है। इस गोली के प्रयोग से नपुंसकता-नामर्दी तथा शीघ्रपतन भी दूर हो जाता है।

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3. हल्दी महीन 1 ग्राम, शीतल चीनी महीन 6 माशा, भीमसेनी कपूर एक ग्राम, अफीम 2 रत्ती, महीन मिस्री 2 ग्राम।
उपरोक्त औषधियाँ एकत्र करें और सभी को बारीक-बारीक घोंट-पीसकर एक जान कर लें। पीसने के पश्चात् चूर्ण को किसी शीशी में सुरक्षित रखें। यह योग स्वप्नदोष की चिकित्सा के लिए अति उपयोगी, असरकारक एवं श्रेष्ठ लाभ उत्पन्न करता है। इसके प्रभाव में स्वप्नदोष पर तो अंकुश लगता ही है। साथ ही वीर्य के समस्त दोष भी समाप्त हो जाते हैं। वीर्य शुद्ध तथा शक्तिशाली हो जाता है। नपुंसकता तथा शीघ्रपतन भी इस योग से नष्ट हो जाता है। रोगी के अंदर इसके प्रयोग से बल-वीर्य तथा कांति का संचार हो जाता है। एक मात्रा रात को सोते समय शीतल जल से सेवन करने का निर्देश देने से आशातीत लाभ प्राप्त हो जाता है।

Swapandosh(Nightfall) Door Karne Ke Desi Ayurvedic Upay

4. महीन पिसा मुलहठी चूर्ण 2 ग्राम, शहद 6 ग्राम, घी 3 ग्राम।
यह एक मात्रा है। उपरोक्त तीनों एक साथ मिला दें और स्वप्नदोष के रोगी को सुबह के समय चाटने का निर्देश दें। औषधि चाटने के पश्चात् पीड़ित रोगी को ऊपर से दूध पीने की भी सलाह दें। यह योग स्वप्नदोष की चिकित्सा के लिए अतिशय गुणकारी है। इसका प्रभाव तीव्रता के साथ होता है और स्वप्नदोष पर अंकुश लग जाता है। शीघ्रपतन तथा नपुंसकता पर भी इस योग का व्यापक असर होता है। आवश्यकतानुसार पीड़ित रोगियों को प्रयोग करने के लिये दें।

5. सफेद चंदन बुरादा 6 ग्राम, सूखा आँवला 6 ग्राम, धनिया 6 ग्राम, ताजा गिलोय 6 ग्राम।
यह अति उपयोगी योग है। इसके प्रयोग से गर्म तासीर के लोगों को तरावट प्राप्त हो जाती है। उपरोक्त सभी औषधियाँ कूटकर चूर्ण कर लें और उसके पश्चात् रात को सोने से पूर्व कोरी हाँडी में डालकर एक पाव पानी में भिगोकर रख दें। सवेरे उठने के बाद छानकर पानी पी जाने का निर्देश दें। यह योग स्वप्नदोष की समस्त अवस्थाओं पर अंकुश लगा कर बल-वीर्य की वृद्धि करता है। नपुंसकता तथा शीघ्रपतन पर भी आशातीत प्रभाव पड़ता है।

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6. कौंच के बीज 250 ग्राम, गाय का दूध 250 मि.ली., काली मूसली 250 ग्राम, पिपली डेढ़ ग्राम।
उपरोक्त तीनों औषधियों का चूर्ण तैयार करके दूध में उबाल दें। खूब उबालने के बाद जब दूध औषधियों में शोषित हो जाये तब नीचे लिखी जा रही औषधियों को चूर्ण कर मिला दें।
दाल चीनी 22 ग्राम, छोटी इलायची 22 ग्राम।

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