Swapndosh Ke khaas Kaaran Aur Achuk Desi Upay स्वप्नदोष के ख़ास कारण और अचूक देसी उपाय

Swapndosh Ke khaas Kaaran Aur Achuk Desi Upay स्वप्नदोष के ख़ास कारण और अचूक देसी उपाय

स्वप्नदोष से अर्थ-

जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है एक ऐसा दोष, जो स्वप्न में होता है। स्वप्नदोष देखा जाये तो कोई रोग या दोष नहीं है, यह तो युवावस्था की एक स्वाभाविक व नेचुरल प्रक्रिया है, जो कि अगर महीने में 2 से 3 बार हो, तो कोई चिंता की बात नहीं। मगर इससे अधिक मात्रा में स्वप्नदोष होता है, तो यह आगे चलकर गंभीर समस्या उत्पन्न कर सकती है।

अगर परिचय या परिभाषा की बात की जाये, तो बिना इच्छा के नींद में कोई कामुक व उत्तेजक स्वप्न देखते हुए वीर्यपात हो जाने को स्वप्नदोष कहा जाता है।

स्वप्नदोष के खास कारण-

काफी समय से संभोग न करना, अश्लील पुस्तकें पढ़ना, अश्लील चित्र देखना, कामवृत्ति को जगाने वाली बातों में अधिक रूचि लेना, वीर्यवर्धक औषधियों का अधिक प्रयोग करना, अप्राकृतिक मैथुन का आदी होना आदि नाईट फाॅल के प्रमुख कारण हैं।

नाईट फाॅल से जुड़ी बातें-

Swapndosh Ke khaas Kaaran Aur Achuk Desi Upay

यदि आप अपनी पत्नी, प्रेमिका या नायिका से दूर रहने के कारण संभोग नहीं कर रहे हों, तो मास में 2-3 या 4 बार तक नाईट फाॅल हो जाना चिंता की बात नहीं है। लेकिन इससे अधिक होना या संभोग बीच-बीच में करने के बाद भी नाईट फाॅल होना शरीर का अस्वस्थता का परिचायक है।

Swapndosh Ke khaas Kaaran Aur Achuk Desi Upay

कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो संभोग करके सोते हैं, फिर भी नाईट फाॅल हो जाता है। ऐसे लोगों की स्थिति काफी चिंताजनक होती है। इन्हें रोगोत्पत्ति के कारणों से यथासंभव बचना चाहिए। रात को सोने से पहले हाथ-पैर एवं चेहरे को अच्छी प्रकार ठंडे पानी से धोना चाहिए। अन्यथा बराबर वीर्य की कमी(क्षरण) होने से संभोग में सफलता और आनंद का अभाव होने लगता है और धातु पतला होने लगता है। यदि समय पर चिकित्सा नहीं की जाये, तो रोगी नपंुसक, हीन भावना, ग्लानि आदि का शिकार हो सकता है। यदि रोगी शादीशुदा हो तो स्थिति और गंभीर हो जाती है।

यहां कुछ ऐसे योग बताये जा रहे हैं, जो लाभदायक होने के साथ-साथ हानिरहित भी हैं…

1. भोजन के बाद नियमित प्रतिदिन सुबह 1-2 केले शुद्ध शहद 2-4 बूंद डालकर खायें। नाईट फाॅल एवं वीर्य विकारों में लाभ होगा। धैर्य के साथ लगातार सेवन करें।

2. प्रतिदिन सुबह-शाम 3 से 5 तक गुलाब के ताजा फूल मिश्री के साथ घोंटकर गाय के दूध में मिलाकर पीने से नाईट फाॅल नहीं होता है।

3. गर्मियों में(ग्रीष्म ऋतु में) गोंद कतीरा(कतीरा गोंद) 10 ग्राम प्रतिदिन रात को पानी मि.ली. में भिगो दें। सवेरे फूलकर लुआबदार हो जायेगा। इसमें मिश्री 20 ग्राम मिलाकर पिलायें। दो सप्ताह में लाभ होगा। यह योग स्वभाव से शीतल प्रभावयुक्त है, इसीलिए ग्रीष्म ऋतु में लेना है। बरसात और जाड़े में मत लें।

4. बबूल का गोंद 10 ग्राम प्रतिदिन रात को पानी 100 मि.ली. में भिगो दें। सवेरे मिश्री 20 ग्राम मिलाकर घोंटकर पीने को दें। ऐसा प्रतिदिन सेवन करने से 21 दिन में निंद्रास्खलन रोग ठीक हो जाता है। इस योग को किसी भी मौसम में ले सकते हैं।

5. इमली के बीज 200 ग्राम दूध में भिगोकर दें। अच्छी प्रकार फूल जाने के बाद छिलका उतार लें। इमली के गिरी(मींगियों) का वजन कर लें। जब मींगियों को घोंटकर, इसके वजन के बराबर मिश्री मिलाकर, घोंटकर जंगली बेर के बराबर गोलियां बना लें। सुबह-शाम एक-एक गोली सेवन करने से स्वप्नदोष से मुक्ति मिल जाती है। औषधि जल से लें। गर्म तथा भारी भोजन मत दें।

6. बबूल के कोमल पत्ते 6 से 10 ग्राम प्रतिदिन सवेरे शीतल जल पीने से निंद्रास्खलन रोग एवं धातु रोग ठीक हो जाता है। बहुत ही उपकारी योग है।

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7. गाय के दूध आधा लीटर 3-4 छुहारे उबालकर मिश्री 20-30 ग्राम भी डाल दें। जब दूध आधा रह जाये तो छुहारे की गुठली निकाल कर छुहारा खाकर दूध पी लें। प्रतिदिन लेने से स्वप्नदोष, शीघ्रपतन एवं वीर्य का पतलापन आदि में लाभ होता है। यह योग अन्य योगों की अपेक्षा जाड़ों में अधिक उपयोगी है।

8. शुद्ध गंधक 2 ग्राम और 2-3 वर्ष का पुराना गुड़ 10 ग्राम मिलाकर प्रतिदिन धारोष्ण गोदुग्ध के साथ लेने करने से निंद्रास्खलन एवं समस्त प्रकार का प्रमेह दूर हो जाता है।

9. त्रिफला का क्वाथ(काढ़ा) या जौ का काढ़ा रात को तैयार कर रख दें। प्रातः सेवन करें। यदि काढ़ा जौ का हो, तो थोड़ा शहद मिला लें। ऐसा प्रतिदिन सेवन करने से निंद्रास्खलन रोग ठीक हो जाता है। त्रिफलादि क्वाथ बना बनाया भी मिल जाता है। यदि स्वयं क्वाथ तैयार करने में असमर्थ हों तो बाज़ार से लेकर प्रतिदिन दो मात्रायें लें।

10. बड़ा गोखरू का फांट सुबह-शाम लेने से निंद्रास्खलन रोग ठीक हो जाता है।

11. शुष्म धनिया चूर्ण 3-6 ग्राम खांड में मिलाकर प्रतिदिन रात को सोने से पहले लें।

Swapndosh Ke khaas Kaaran Aur Achuk Desi Upay

12. शतावरी, असगंध नागौरी, बिधारा की जड़ समभाग चूर्ण बनाकर बराबर मात्रा में खांड मिला दें। 2-3 ग्राम प्रतिदिन गाय के दूध के साथ सेवन करने से लाभ होता है।

नोट- मूत्र करने के बाद या पखाना करने के समय मामूली जोर लगाने से भी यदि वीर्य निकल जाये, तो इसे वीर्य प्रमेह कहते हैं। इसमें भी वही योग उपयोगी है, जो निंद्रास्खलन रोग में उपयोगी है।

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