Swapndosh Ko Jad Se Khatam Karne Ki Ayurvedic Chikitsa

Swapndosh Ko Jad Se Khatam Karne Ki Ayurvedic Chikitsa

स्वप्नदोष को जड़ से खत्म करने की आयुर्वेदिक चिकित्सा

स्वप्नदोष(Nightfall)-

निंद्रावस्था में बिना उत्तेजना या बिना स्त्री प्रसंग किये स्वतः वीर्य स्खलन हो जाने को ‘स्वप्नदोष’ कहते हैं। जागने पर व्यक्ति अपने कपडे़ गीले पाता है।

किसी व्यक्ति को यदि नाईट फाॅल कभी-कभी अर्थात् मास में 1-2 बार हो जाये तथा इसके बाद कमजोरी का कोई लक्षण न हो, बल्कि वह चुस्त व चालाक और चित्त प्रसन्न हो, तो उसे यह रोग नहीं हैै। परन्तु जब यह स्थिति मास में 5-7 या और भी अधिक बार हो जाये, तो उसे रोग समझना चाहिए। नाईट फाॅल की समस्या में लक्षण के रूप में रोगी को सिरदर्द, चक्कर आना, थकावट व सुस्ती, स्वभाव में चिड़चिड़ापन, शरीर में शक्तिहीनता का अनुभव होता है।

स्वप्नदोष के लक्षण(Symptoms of Nightfall)-

स्वप्नदोष रोगावस्था में धातु स्खलन के साथ-साथ स्मृति-शक्ति की कमी, शरीर और मन की हीनता, निस्तेज चेहरा, भूख की कमी, मंदाग्नि, प्यास की अधिकता, सुस्ती, आलस्य, हाथ-पांव के तलुवों में जलन, तालु, कंठ, जीभ तथा दांतों पर मैल, हृदय अधिक धड़कना, रक्ताल्पता, कमर तथा शरीर के अन्य भागों में दर्द, वीर्य का पतलापन, शीघ्रपतन, अस्थिरता, बड़ों या नये लोगों के साथ सलज्जभाव, सिर में चक्कर आना, वज़न की कमी, आंखों के पीछे दर्द आदि लक्षण होते हैं।

Swapndosh Ke Liye Ayurvedic Chikitsa

स्वप्नदोष के कारण(Causes of Nightfall)-

उत्तेजक दृश्य देखना, वासनामय विचार, मदिरा व मादक द्रव्यों का अत्यधिक प्रयोग, अश्लील चित्र देखना व गंदा साहित्य पढ़ना, काम, चर्चा, अत्यधिक स्त्री सहवास, पेट के बल सोना, स्त्रियों के प्रति अत्यधिक आसक्ति, खाना खाते ही सो जाना, पेट के कीड़े, हस्तमैथुन, गुदामैथुन, मानसिक परिश्रम की अधिकता, खट्टी-मीठी, चटपटी तथा गर्म वस्तुओं का प्रयोग, पाॅस्टेट ग्लैण्ड की खराश, वीर्य की थैलियों की ऐंठन, स्तम्भन शक्ति की कमी, वीर्य की अधिकता, वीर्य की गर्मी, मूत्राशय की खराश, अर्श, घुड़सवारी आदि इसके कारण हो सकते हैं।

स्वप्नदोष की आयुर्वेदिक चिकित्सा-

swapndosh.co.in

1. सबसे पहले रोगी को इच्छाभेदी रस या एरण्डभृष्ठ हरीतकी चूर्ण देकर पेट साफ करें। फिर नपुंसकता प्रकरण में वर्णित उदररोगनाशक तथा पाचनशक्ति वर्धक किसी एक व्यवस्थापत्र की औषधियां 15 दिन तक दें।

2. पेट में कृमि होना कृमिकुठार रस 1-1 टिकिया 3 बार तथा विडंगारिष्ट 4-4 चम्मच 2 बार भोजन के बाद बराबर पानी मिलाकर 15 से 30 दिन तक दें तथा प्रत्येक सप्ताह रात में सोते समय एरण्डभृष्ठ हरीतकी चूर्ण या पंचसरकार चूर्ण का विरेचन दें।
अथवा
वर्मकिलर कैप्सूल(आयुर्वेद विकास) 1-2 कैप्सूल दिन में 2 बार 5 दिन तक दें तथा पांचवें दिन रात में सोते समय 1 टिकिया फिनोलैक्स गर्म पानी के साथ दें।

3. कब्ज़ के लिए ईसबगोल की भूसी या ईसबगोल की भूसी़ $ त्रिफला चूर्ण या नेचर केअर या नेचुरोलैक्स रात में सोते समय 1-2 चम्मच देते रहें।

4. यदि नींद ठीक से नहीं आती हो, तो दोनों समय भोजन के बाद अश्वगंधारिष्ट या स्मृतिबल सीरप(आयुरलैब) 4-4 चम्मच 2 बार भोजन के 15 मिनट बाद बराबर पानी मिलाकर दें। पैर के तलुवों तथा सिर में तेल की मालिश करायें।

5. यदि खाया हुआ भोजन ठीक से नहीं पचता हो तो दोनों समय भोजन के बाद आधा-आधा चम्मच उदरामृत शंख योगम या लवण भास्कर चूर्ण या प्राणाचार्य चूर्ण या भीमसेनी चूर्ण या गैस्ट्रोन चूर्ण या रूचिका चूर्ण दें। इससे खाया हुआ भोजन अच्छी तरह पच जाता है तथा गैस बननी बंद हो जाती है।

6. शरीर में बढ़ी हुई गर्मी दूर करने के लिए गिलोयसत्व, प्रवालपिष्टी, आंवला स्वरस या आमलकी रसायन का प्रयोग करें। चन्द्रनासव भी पिलायें।

7. रक्तदोष दूर करने के लिए आरोग्यवर्द्धिनी बटी, गंधक रसायन, रसमाणिक्य, सारिवाद्यासव, महामंजिष्ठाधारिष्ट, आरोग्यमिश्रण(पटियाला), गंधक मिश्रण(पटियाला), सारसी टिकिया(पटियाला), सारसरीना प्रवाही(पटियाला), हीमक्योर कैप्सूल तथा हीमक्योर सीरप(आयुरलैब), एलर्जिन कैप्सूल(प्राणाचार्य), बीक्लीन सीरप(प्राणाचार्य), सोरा कैप्सूल(आयुरलैब), सैफ्टो कैप्सूल आदि औषधियों में से किसी 1-2 कई का आवश्यकतानुसार प्रयोग करें।

आप यह आर्टिकल swapndosh.co.in पर पढ़ रहे हैं..

8. दुर्बलता अधिक प्रतीत होने पर द्राक्षासव, अश्वगंधारिष्ट, द्राक्षोविटा(पटियाला), तेजस प्रवाही(पटियाला), फलासव(प्राणाचार्य), चीअर अप(आयुलैब्स) में से कोई एक 4-4 चम्मच दो बार भोजन के 15 मिनट बाद बराबर जल मिलाकर दें।

9. वीर्य विकार दूर करने के लिए चन्द्रप्रभा बटी, वीर्यशोधन बटी, वीर्यशोधन चूर्ण, रसायन चूर्ण आदि में से किसी एक-दो या कई का प्रयोग करें।

10. नाईट फाॅल रोकने के लिए स्वप्नदोषान्तक योगम्(धन्वन्तरि आरोग्य), स्वप्नारि टिकिया(पटियाला), स्वप्नदोषहर चूर्ण(प्राणाचार्य), रसायन चूर्ण, चन्द्रप्रभा बटी में से किसी एक-दो या कई का प्रयोग करें।

11. रोगी को शारीरिक तथा मानसिक तौर पर पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करने के लिए कहें।

12. कामुक चिन्तन, कामुक, वार्तालाप, कामुक दृश्य दर्शन, कामुक संगीत श्रवण, कामुक फिल्म दर्शन, कामुक चेष्टा, कामुक साहित्य पढ़ना आदि से रोगी को बचना चाहिए तथा अपना मन सदाचार, संयम और सद्पृवति की ओर लगाना चाहिए। धार्मिक और चरित्रवान साहित्य पढ़ना चाहिए।

13. रोगी का भोजन हल्का, सादा, सुपाच्य एवं शाकाहारी होना चाहिए। अधिक मिर्च-मसालेदार, गर्म, उत्तेजक, गरिष्ठ एवं बादी पदार्थों से परहेज करना चाहिए।

14. रात्रि का भोजन सोने से कम से कम दो घण्टे पहले कर लेना चाहिए।

Swapndosh Ko Jad Se Khatam Karne Ki Ayurvedic Chikitsa

15. शाम में चाय, काॅफी आदि गर्म एवं मादक पदार्थों का सेवन नहीं करें। चाय के बदले दूध में अश्वगंधा सेलेस्टियल ब्रू तथा ब्राह्मी सेलेस्टियल ब्रू क्वीक घोलकर पीना चाहिए।

16. रात में सोते समय गर्म दूध का सेवन नहीं करें।

17. पानी 1-1 गिलास करे प्रतिदिन 15-20 गिलास पीना चाहिए। प्रातःकाल ऊषापान करना चाहिए।

18. रात में सोने से पहले पेशाब कर लेना चाहिए।

19. रात्रि 10 बजे तक अवश्य सो जाना चाहिए तथा प्रातः 4 बजे सोकर उठ जाना चाहिए। अधिकांश मामलों में नाईट फाॅल प्रातः 4 बजे के बाद ही होता है। अतः यदि युवक 4 बजे से पहले उठ जायें, तो नाईट फाॅल होगा ही नहीं।

20. रात्रि में सोने से पहले ईश्वर का ध्यान करना चाहिये। भगवान का नाम लेते हुए अपने ईष्ट देव का ध्यान करते हुए सोयें। इसस मन में सुविचार, शांति व धार्मिक सुकून रहेगा।

21. भोजन में हरी शाक-सब्जी, सलाद, मौसम के फल, मट्ठा आदि पर्याप्त मात्रा में लें।

22. मदिरापान, धम्रपान, पान-मसाला आदि का पूर्ण परहेज करें।

23. यदि किसी रात स्वप्दोष हो भी जाये तो घबराना नहीं चाहिए। महीने में 1-2 बार नाईट फाॅल हो जाने पर शरीर को कोई हानि नहीं पहुंचती है। अतः व्यर्थ की चिंता नहीं करना चाहिए।

Swapndosh Ke Liye Ayurvedic Chikitsa

सेक्स समस्या से संबंधित अन्य जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें..http://chetanonline.com/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *