Swapndosh Me Kya Kare Or Kya Na Kare

Swapndosh Me Kya Kare Or Kya Na Kare

स्वप्नदोष में क्या करें और क्या न करें

स्वप्नदोष, नाईट फाॅल(Nightfall)

स्वप्नदोष की समस्या में व्यक्ति को कभी-कभी नींद में किसी खूबसूरत अथवा अपनी मनपसंद हाॅट लड़की का स्वप्न आता है, जिसमें वह अपनी दबी हुई वासना को उनके निर्वस्त्र अंग-प्रत्यंगों को सहला कर अथवा संभोग करके शांत कर रहा होता है, जिस कारण एकाएक इतनी उत्तेजना प्रबल हो जाती है व्यक्ति को लगता है, जैसे वह हकीकत में उस स्त्री के साथ संभोग का आनंद ले रहा है और उसका वीर्य वस्त्र में ही निष्कासित हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को ही स्वप्नदोष कहते हैं।
लेकिन यहां एक बात और ध्यान देने योग्य है कि अगर तो ऐसा युवा उम्र व जवानी की ओर रख रहे कदम के चलते कभी-कभी होता है, तो यह रोग की श्रेणी में नहीं आता है। हां, अगर बार-बार या फिर लगातार नींद में वीर्यपात होता है, तो रोग समझा जायेगा, जिसका उपचार अनिवार्य हो जाता है। अन्यथा भविष्य में यह गंभीर समस्या भी बन सकती है, जिसके चलते अन्य सेक्स रोग भी हो सकते हैं, जैसे कि शीघ्रपतन या फिर नपुंसकता

आप यह हिंदी लेख swapndosh.co.in पर पढ़ रहे हैं..

स्वप्नदोष के लक्षण-

जब इस रोग की शुरूआत होती है तो व्यक्ति स्वप्न में स्त्री के साथ संसर्ग कर रहा होता है और कपड़ों में ही स्खलित हो जाता है। इस प्रकार का स्वप्न उसे होता है। लेकिन फिर धीरे-धीरे व्यक्ति को स्वप्न में देखी कामुक घटना याद रहना बंद हो जाता है, बस सुबह ही पता चलता है कि वस्त्र गंदा हो गया है, यानी वीर्यपात हो गया है। कभी-कभी तो सप्ताह भर ऐसा नहीं होता, व्यक्ति ठीक रहता है। लेकिन फिर जब पुनः यह क्रम शुरू होता है, तो लगातार कई-कई दिन तक भी स्वप्नदोष होता रहता है, जोकि उग्र समस्या कही जा सकती है।
इस समस्या में व्यक्ति के अंदर निम्न लक्षण दिखाई देने लगते हैं जैसे- चेहरा मुरझा जाता है और अंदर की ओर धंसा महसूस होता है, सारे दिन कमजोरी महसूस होती है, सुस्ती व आलस्य से व्यक्ति घिरा रहता है, थकान महसूस होती है, कमर में दर्द, हाथ-पैरों का दुखना, आंखों के नीचे काले घेरे पड़ जाना इत्यादि लक्षण दृष्टिगोचर होते हैं।

यह भी पढ़ें- ल्यूकोरिया

स्वप्नदोष के कारण-

गंदे अश्लील विचार, संभोग अधिक करना, अत्यधिक हस्तमैथुन की लत, गुदा मैथुन, कब्ज़, कुंवारापन यानी बिना विवाह के रहना, सुंदर स्त्रियों के सम्पर्क में अधिक रहना, शरीर में गर्मी, भोजन करने के बाद तुरन्त सो जाना, पेट में कीड़े होना, प्राॅस्टेट ग्लैण्ड की खराश, सुपारी का लम्बा होना, मूत्रमार्ग का प्रदाह, कामुक प्रवृत्ति का होना, उत्तेेजना उत्पन्न करने वाले वस्तुओं का ज्यादा इस्तेमाल करना, स्तम्भन शक्ति का अभाव, वीर्य की थैलियों की एैंठन, अश्लील फिल्में देखना, अश्लील साहित्य पढ़ना, नशीली वस्तुएं जैसे शराब आदि का अधिक प्रयोग, गरम मसाले और खट्टे भोजन अधिक खाने से भी यह दोष उत्पन्न हो जाता है।

स्वप्नदोष में क्या करें, क्या न करें-
(आदेश एवं निषेध)

Swapndosh Me Kya Kare Or Kya Na Kare

1. सर्वप्रथम रोगी को इस रोग के भय एवं अवास्तविक विचारों से मुक्त करके उसके मनोबल को बढ़ायें।

2. रोगी को आश्वासन दें कि यदि वह उचित आहार-विहार और संयम से काम ले तो उसका यह रोग शीघ्र ही दूर हो जायेगा और थोड़ा-बहुत स्वप्नदोष होना उसके स्वाथ्य को कोई हानि नहीं पहुंचाता है।

3. रोगी को यह कठोर आदेश दें कि वह अपना ध्यान बार-बार शिश्न की ओर न ले जाये और किसी स्त्री के रूप और आकृति को भी मन में ना लाये। उसे प्रतिदिन अपना समय खेलकूद, व्यायाम, योगासन, प्राणायाम, कुण्डलिनी जागरण आदि में प्रातः और विशेषकर शाम को अवश्य ही देना चाहिए। योगसाधना में बड़ी दिलचस्पी के साथ कार्य करने तथा प्रतिदिन आसन एवं प्राणायाम का अभ्यास करने पर स्वप्नदोष में बड़ा ही लाभ प्राप्त होता है।

Swapndosh Me Kya Kare Or Kya Na Kare

4. रोगी को कभी भूलकर भी कामोत्तेजना उत्पन्न करने वाली बातों पर, उपन्यास आदि पुस्तकों के पठन-पाठन में समय को नहीं लगाना चाहिए। उसे लड़कियों, स्त्रियों यहां तक कि अपनी स्त्री की एकांत संगति से भी हमेशा दूर रहना चाहिए। कभी भूलकर भी किसी स्त्री को स्पर्श या रूप दर्शन का प्रयास नहीं करना चाहिए। यदि किसी स्त्री से बातचीत करना आवश्यक हो तो उसके पैरों की ओर दृष्टि करके बातचीत करनी चाहिए। ऊपर वक्ष की ओर कदापि नहीं देखना चाहिए।

5. रोगी का भोजन सादा और संतुलित हो तथा भूख से कुछ कम मात्रा में खाना चाहिए। रात का भोजन सोने से 2-3 घंटे पहले कर लेना अनिवार्य है। मिर्च, मसाले से युक्त चटपटा भोजन तो कभी करना ही नहीं चाहिए।

6. रात को कभी भी गर्म दूध पीकर सोना नहीं चाहिए अन्यथा बहुतों को इससे स्वप्नदोष हो जाता है या सोते समय इन्द्री अकड़ कर खड़ी हो जाती है, जिससे स्वप्न में वीर्य स्खलन होने की संभावना रहती है। स्वप्नदोष के रोगी को सुबह के समय ही ठंडा किया हुआ उबला दूध पी लेना चाहिए।

7. कब्ज़ पैदा करने वाले भोजन, मद्यपान, नशीले पदार्थ आदि से सख्त परहेज रोगी को करायें।

8. रोगी को रात में जिस समय आंख खुले, उसी समय उठकर मूत्र त्याग कर आना चाहिए, नहीं तो मूत्राशय मूत्र से भरा रहने पर उसका दबाव शुक्राशय पर पड़ता है और वीर्य तुरन्त स्खलित हो जाता है। सुबह में कुछ रोगियों को लगभग एक निश्चित समय प्रातः 4 से साढ़े 5 के मध्य अंतराल में वीर्यपात हो जाता है। ऐसे रोगियों को वीर्यपात के समय से पूर्व ही उठकर नित्यकर्म शौचादि से निपट कर स्वच्छ वायु में प्रतिदिन भ्रमण करने चले जाना चाहिए। सोने से पहले प्रतिदिन ऐसा संकल्प करें कि 3 बजे ब्रह्ममूरत में ही झटपट उठ जायें और फिर आलस्य नहीं करें। सोकर उठने के बाद सभी कार्य फुर्ती और तेजी से उत्साहपूर्वक करें।

9. तंग अंडरवियर, पैंट और लंगोट पहनकर मत सोयें, क्योंकि सोते समय शिश्न पर कड़े वस्त्र की रगड़ का दबाव पड़ने से अनायास वीर्य स्खलित हो जाता है।
सावधान- बहुत मुलायम, स्पंज, सदृश, गुदगुदे, कोमल और मोटे गद्देदार पलंग या बिछावन पर भी मत सोयें, क्योंकि इससे भी अधिक स्वप्नदोष होने की संभावना रहती है। रोगी को कदापि चित्त होकर नहीं सोना चाहिए। उसे विशेषकर बाईं करवट लेटकर सोना चाहिए, इससे भोजन भी भली-भांति पच जाता है।

10. रोगी व्यर्थ कभी बैठा न रहे, उसे हर समय अपने मन को उत्तम रचनात्मक कार्य, पूजा-पाठ, धार्मिक ग्रन्थों आदि के अध्ययन-मनन, अपने पवित्र व्यवसाय को पर्याप्त मानसिक एवं शारीरिक श्रम के साथ सम्पादित करने, सात्विक मनोविनोद एवं सत्साहित्य के अध्ययन में(अपने अमूल्य समय का विचार कर) लगाना चाहिए।

किसी भी सेक्स समस्या की जानकारी व सलाह के लिए इस लिंक पर क्लि करें..http://chetanclinic.com/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *